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Sunday, May 20, 2012

गुलाम-ए-हिंद : Parmanu Origins

One of the story previews I posted on now defunct Raj Comics Forums and got great reviews.

गुलाम-ए-हिंद : Parmanu Origins -


तूफानों की रंजिश से वतन बेनूर हो जाये,
हर मौसम मे सिर्फ पतझड़ ही लौट कर आये.
फिर भी चैन से सो लो ए मेरे देश के बंदो,
अभी जिंदा जो है हिंद के चंद सरमाये.


"इंस्पेक्टर विनय, रिकार्ड्स के अनुसार समीर खान एक दुर्दांत आतंकवादी है जिसका संबंध पहले कई आपराधिक व आतंकी गिरोहों से रह चुका है. यहाँ तक की खालिस्तानी आतंकियों का ये प्रमुख साझेदार था. इसको कुख्यात कालापानी जेल मे अपने आतंकी गिरोह को पकडवाने के लिए सरकारी गवाह बनाया गया था जिसकी एवज़ मे इसको सिर्फ 22 साल कैद मिली. पर सुरक्षा एजेंसियों ने ये आशंका जताई है की ये आतंकवादी अपने सीने मे कई और राज़ दफनाये ही है और ये अपनी आतंकी जड़ो तक ज़रूर वापस लौटेगा. तुम्हे इस पर निगरानी रखनी है और हर हफ्ते इसकी गतिविधियों की रिपोर्ट देनी है. अगर समीर खान की कोई संदिग्ध गतिविधि हद से ज्यादा बढ़ जाती है जिस से लोगो की जान पर बन आये तब तुम इसको स्थिति अनुसार रोक या मार सकते हो."

परमाणु - प्रोबोट...कालापानी जेल से छूटने के बाद यासिर खान सीधा दिल्ली के सीमावर्ती इलाके मे आया है तो अब निगरानी का काम इंस्पेक्टर विनय से ज्यादा तुम्हारे कैमरों और परमाणु को करना होगा.

प्रोबोट - समीर खान मेरे कैमरों की रेंज मे आ गया है और उसकी लिप रीडिंग से मुझे पता चला है की वो लोगो से मीना चौक का पता पूछ रहा है. मीना चौक मे ऐसी क्या ख़ास बात है?

परमाणु - मीना चौक मे बहुत बड़ा मेंटल हॉस्पिटल है जहाँ मै अक्सर मानसिक रूप से विक्षिप्त अपराधियों को भर्ती करवाता हूँ.

परमाणु एक सीमित दूरी से यासिर खान का पीछा करता है जो मीना चौक के मानसिक चिकित्सालय मे जाता है. कुछ ही मिनटों बाद उस जगह बहुत बड़ा बम ब्लास्ट होता है. उस मानसिक चिकित्सालय की जगह अब एक सुलगता हुआ मलबे का ढेर था और हर तरफ लाशें, खून और मांस के लोथड़े थे. यासिर खान का कहीं कोई नामोनिशान नहीं था...शायद वो भी मर गया था या शायद ये ब्लास्ट उसी ने कराया था. पर उन लाशों मे एक बूढी औरत मामूली चोटों के साथ चमत्कारिक रूप से अर्धबेहोशी की हालत मे थी.

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परमाणु ने उसे उठाया की तभी उस औरत मे जान आ गयी उसने परमाणु के सिर पर मातृत्व स्नेह वाला हाथ फेरा और बेटा कहकर उस से चिपट गयी....परमाणु के लिए ये नयी अनुभूति थी. माँ होने की कल्पना से ही उसके जिस्म मे सिरहन दौड़ गयी....वो सब कुछ भूल कर उस ममता भरे स्पर्श मे डूब गया और उस औरत को एकटक देखता रहा. वो महिला फिर बेहोश हो गयी. लोगो ने परमाणु को बताया की वो एक पागल महिला है. विनय बनकर परमाणु उस वृद्ध महिला को अपने घर ले गया जहाँ उसने स्थिति ठीक होने तक उसकी देखभाल के लिए ममता पाठक को भी बुला लिया. विनय अपनी इस छदम ही सही पर माँ को अपने साथ ही रखना चाहता था. वो वृद्धा विनय को अपना बेटा मानती थी और उसके मिलने की ख़ुशी मे वो गीतासार गुनगुनाती रहती थी.

"युद्धक्षेत्र मे जब अर्जुन ने तजा धनुष और बांड.......
कहा कृष्ण ने शस्त्र उठाओ योद्धा बनो महान....."


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विनय - तुम्हे तो बहुत गोलियां लगी है समीर खान....बताओ तुम्हारा मकसद क्या है? कौन तुम्हे मारना चाहता है....तुम्हारा शरीर झुलस गया है...मरते वक़्त तो ईमान का काम करते जाओ...

समीर खान - विनय मेरे बच्चे...यासिर...मै...तेरा वालिद...तेरा पिता...यासिर खान हूँ....

"दोनों और खड़ी थी सेना अर्जुन घबराये....
देख के अपने कुल संबंधी कमल नैन भर लाये......"


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स्थान - उत्तर प्रदेश के सांसद केशवनाथ का आवास, बरेली.

"नेता जी...केशवनाथ जी....एक इंस्पेक्टर अपनी जीप लेकर आपके बंगले मे घुस आया है और आपके सुरक्षाकर्मियों को मारता हुआ आपकी तरफ बढ़ रहा है."

केशवनाथ - अरे!!! सैकड़ो पालतू किस दिन के लिए पाल रखे है किसी न किसी की गोली से आँगन मे आने से पहले मर जाएगा.

विनय - मरते तेरे जैसे कीड़े है, जो कुचले जाने तक वतनपरस्तो के जूतों का नाप नहीं जानते.

केशवनाथ - कीड़ा तो अभी भी तू है...मेरे आँगन मे ही 2 दर्जन बंदूकधारी है...कुचल सके तो कुचल दे मुझे.....

विनय - ठीक है.

केशवनाथ के 2 दर्जन बंदूकधारी 2 सेकंड्स मे परमाणु ब्लास्ट्स से मारे गए.

केशवनाथ - तू...तू..तो परमाणु है.

परमाणु - अब ये बात यमराज को बताना.

इंस्पेक्टर विनय को दिवंगत मंत्री जी के आवास पर घुसते कैमरों ने रिकॉर्ड किया है फिर वो बाहर नहीं आया..बरेली की सारी सीमाएं सील कर दी जाये और विनय को तुरंत नीलमभित करके गिरफ्तार किया जाये.

"अपने हाथों से अपनों के कैसे हर लूँ प्राण......
कहा कृष्ण ने शस्त्र उठाओ योद्धा बनो महान..."


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फैजाबाद लेबर अड्डा

विनय - क्या मुझे यहाँ काम मिलेगा?

मज़दूर - तुम्हे तो सबसे पहले काम मिलेगा, बाबू! गठीले बदन के हो, हर ठेकेदार को ऐसे मजदूर चाहिए.....लगता है खूब घी-दूध पिया है अपने गाँव मे.

"सिर्फ अमर है अजर आत्मा बस शरीर मर जाये....
जैसे वस्त्र पुराने तज कोई नए वस्त्र अपनाये......"


मजदूरी का काम करते विनय को हर दम उसकी "माँ" निहारा करती....वो उनसे धूप मे ना आने को कहता पर वो बस उसको निहारा करती जैसे ना जाने कितने बरसो की कसर निकाल रही हो. तभी एक दिन.

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"हम आप तक पहुँच ही गए, फातिमा खाला!"

फावड़ा लिए गुस्से से फुफकारता विनय उनके बीच मे आया.

"दूर हटो इनसे..."

"लो अब ये फावड़े से बंदूको का सामना करेगा....लगता है पगली फातिमा का असर आ गया है तुझ पर...हा हा हा हा हा....."

"है सारा संसार है मुझमे पृथ्वी, गगन, शक्ति.....
सारे जीव समाये मुझमे मेरे अंश सभी......"


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सारी बातें बेमानी लगती है जब अपने वजूद ही न पता हो....और अपनी पहचान के लिए संघर्ष करना पड़े....
और कभी-कभी अपनी पहचान पाने के लिए खुद को खोना पड़ता है......

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"देख विराट रूप भगवन का अर्जुन कांप गए....
उठा लिया तब धनुष हाथ मे साध लिए सब बांड...
कहा कृष्ण ने शस्त्र उठाओ...योद्धा बनो महान...
बोले...योद्धा बनो महान..."


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"शहीद समीर खान और दिल्ली पुलिस निरीक्षक संख्या 19009 शहीद विनय वर्मा उर्फ़ यासिर खान को सलामी देंगे...............


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