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Friday, June 20, 2014

2 अंडो की कहानी - मोहित शर्मा (ज़हन)


दुर्गम क्षेत्रो, परिस्थितियों में रहने वाली पक्षियों की कुछ प्रजातियाँ जो प्रजनन के बाद 2 या 3 अंडे देती है। अब यह तो कंगाली में आटा गीला वाली बात हो गयी पहले ही इतनी विषम परिस्थिति है ऊपर से 2 या 3 अंडे, अरे एक अंडा दो-उसकी ढंग से परवरिश करो, क्यों एक से ज़्यादा बच्चे करके अपने परिवार का जीवन यापन डुबो रहे हो। बात सुनी-सुनी सी लग रही है न? पर यहाँ क्या प्रकृति की मत मारी गयी है जो 2-3 अंडे करवा देती है? शहरी लोग एक बच्चा कर सेफ, सुखी लाइफस्टाइल जीने की इच्छा में है, यह एक समझदारी भरा काम है बशर्ते सामाजिक, राजनैतिक माहौल स्थिर और निष्पक्ष हो।
पहली बात तो प्रकृति !#@#$% नहीं है जो उन पक्षियों के एक से अधिक अंडे करवाती है, क्योकि विषम परिस्थितियों में इनकी उम्र घट जाती है, फिर अंडे या चूज़े अक्सर जीवन के पहले चरण नहीं पार कर पाते बहुत से घटकों की वजह से जैसे तापमान, शिकारी पक्षी-जानवर, मौसम आदि। प्रकृति के चक्र से गुज़र कर वो पक्षी ऐसे हुए, अगर स्थितियाँ अनुकूल होती तो वो पक्षी एक ही अंडा देते….मादाएं उसमे भी बड़े नखरे करती….ही ही।

यही बात काफी हद तक मनुष्यो पर भी लागू होती है, मान लीजिये आपका एक बच्चा बड़ा होकर किसी बीमारी, दुर्घटना, विषमता का शिकार हो जाए तो सहारे को दूसरा तो होगा। दोनों के साथ कुछ अहित हो जाए तो आप अपनी किस्मत उल्लू के गुल्लू से लिखवा कर लाये होंगे (यानी सम्भावना बहुत ही कम की दोनों लाचार हो जायें) नेचर इतनी लचीली है की अगर सभी मनुष्य 2 या 3 बच्चे करें तो वो आराम से एडजस्ट कर लेगी और यह जनसँख्या विस्फोट जैसी स्थिति नहीं आयेगी। पर जब आपकी कम्युनिटी के एक बड़े हिस्से का एवरेज ही खो-खो की टीम जितना हो तो भगवान ही मालिक है।

तो संभव हो तो कम से कम “हम दो, हमारे दो” वाला पुराना ही सही पर फंडा अपनायें - अपने लिए और अपने समाज और देश के लिये। आपकी पारिवारिक या निजी स्थिति कुछ अलग हो तो यह बात इग्नोर कर सकते है, पर इन जनरल एक वाला फार्मूला ठीक नहीं।

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