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Tuesday, March 31, 2015

विलेन वकील - लेखक मोहित शर्मा (ज़हन)

Near River Gomti, Lucknow
वैसे तो भीड़ हर पेशे में है और बढ़ रही है पर कुछ पेशों में भीड़ के दुष्परिणाम बड़े व चिंताजनक होते है। ऐसा ही एक वर्ग है वकीलों का जो सीमित न्यायालयों में हर वर्ष तेज़ी से बढ़ते जा रहे है। इस बात में कोई दोराय नहीं कि हर जगह की तरह यहाँ अच्छे-बुरे दोनों तरह के लोग होते है। पब्लिक इंटरैक्शन यहाँ काफी होता है आम व्यवसायों के मुकाबले और किन्ही वजहों से उपद्रवी तत्वो की संख्या भी बाकी जगहों से ज़्यादा होती है। तो इस व्यावसायिक समुदाय में लोग आपस में प्रतियोगी तो होते है पर क्लाइंट्स के लिए इन्हे अपना एक बड़ा समूह बनाना पड़ता है। अब दिक्कत यह होती है कि लोगो कि मदद करने वाले कुछ अच्छे समूह होते है पर कई असामाजिक तत्व भी एक जैसी प्रवृति के कारण साथ आ जाते है। फिर अदालतों के साथ-साथ ऐसे तत्व स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी दफ्तरों में सक्रीय होकर दबदबा बनाते हुए मनमानी करते है जो इनकी कमाई का प्रमुख साधन भी बनते है। बड़ी विडंबना है की जिन्हे कानून की धाराओं का सबसे अधिक ज्ञान है वो ही अपने तरीकों से उन्हें तोड़ने में लगे रहते है। न्यायालयों में इनमे से कई वकील बूढ़े, अनपढ़ लोगो को जो किन्ही केसेज में फ़से होते है उन्हें बेवजह दौड़ाते रहते है।  

फिर आते है कभी जाने-अनजाने इनसे`उलझने वाले अफसर, दुकानदार, ट्रांसपोर्ट चालक, पुलिस, आम जनता की हालत पर। लड़ाई किसी की होगी पर झुण्ड 32 का तुरंत बन जायेगा और बिना स्थिति जाने सब यह मान कर बैठते है कि अगर दो पक्षों का विवाद है और उनमे से एक वकील है तो वही सही होगा। ऐसी स्थितयों में अक्सर दूसरे पक्ष के लोगो की जमकर पिटाई होती है और कभी-कबार घायलों की मृत्यु होती है। अब अगर मार खाने वाला पक्ष वकील/वकीलों का है (जो काफी कम होता है) तब आप अगले दिन आप सुर्खियां पढ़ेंगे कि "फलाना शहर के अधिवक्ताओं की अनिश्चितकालीन हड़ताल।" मतलब अगर आपका इनसे विवाद है और आप सही है तो आप कि ऐसी की तैसी निश्चित।  भगवान ना करें कि बात अधिक बढे नहीं तो आप पर कुछ भारी मुक़दमे दर्ज हो जायेंगे जिनको निपटाने में आपका काफी समय एवम धन व्यर्थ होगा। गज़ब की बात है कि स्थानीय मीडिया सदैव इनके पक्ष में रहता है, शायद काम पड़ता रहता होगा इसलिए दोस्ती निभायी जाती है। तो कोशिश करिये कि किसी मामले में पड़ने पर अच्छी जाँच के बाद अपना वकील चुने। यह भी ध्यान रखें की कहीं भी इनसे डील, इंटरैक्शन करते समय धैर्य, सावधानी से काम लें। सार्वजानिक स्थल पर किसी भी वजह से हुए विवाद को बातों से निपटाने की कोशिश करें। सरकारों के रवैये और कानून में भी कुछ बड़े बदलावों की आवश्यकता है ताकि नासमझी, मनमानी और गुंडागर्दी में कमी आये। लखनऊ, मेरठ, भोपाल और दिल्ली में अपने अनुभव के आधार पर यह लेख। 

- मोहित शर्मा (ज़हन) #mohitness #mohit_trendster

Wednesday, March 25, 2015

सरफिरा अनशन (लघुकथा) - लेखक मोहित शर्मा (ज़हन)



पत्रकार - "आप किस के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठे है?"

युवक - "आप लोगो के..." 

पत्रकार - "क्यों ऐसा क्या कर दिया हम मीडिया वालो ने?"

युवक - "पिछले साल मेरी सहकर्मी ने एक लड़ाई के बाद मुझ पर बलात्कार का आरोप लगाया। आप लोगो ने बिना जांच किये पहले पन्ने पर वो खबर छापी। फैसला आने से पहले मैं दोषी हो गया, आपके सौजन्य से मेरे खिलाफ कैंडल मार्च होने लगे और आप लोगो ने उस खबर का फॉलोअप किया जब तक...

...जब तक किसी अनजान जनूनी का पत्थर मेरे पिता जी के सर पर लगकर उन्हें पागल नहीं कर गया, जब तक माँ ने सल्फास की गोलियाँ खाकर अपनी जान नहीं ले ली। पर अब जब यह साबित हुआ कि मैं निर्दोष हूँ तो पहले पेज पर वह खबर क्यों नहीं? दोषियों का फॉलोअप क्यों नहीं? अपनी गलती मानते लेख क्यों नहीं? दूसरों के साँस लेने, पलकें झपकाने तक में खामी निकाल देने वाले अपनी गलतियों की ज़िम्मेदारी लेने में घोंघे क्यों बन जाते हो?"

अगले दिन अखबार की हेडलाइन! -

"सरफिरे युवक के सड़क पर बैठ जाने से शहर की नयी सड़क पर यातायात व्यवस्था में अवरोध। 3 घंटे तक यात्रियों का हाल बेहाल।"

- मोहित शर्मा (ज़हन) #mohitness #mohit_trendster

Tuesday, March 24, 2015

लेखक-कवि मोहित शर्मा (ज़हन) परिचय - प्रादेषिक हिंदी समिति (उ.प्र.)


बचपन से विभिन्न विषयों पर हिंदी, इंग्लिश में कवितायेँ, कहानियाँ लिख रहें मोहित शर्मा (ज़हन), वर्ष 2006 में इंटरनेट के संपर्क में आने के पश्च्यात अधिक सक्रियता से लेखन में जुट गये। दो या अधिक विधाओ के मेल में उन्हें महारत हासिल है जिसके अंतर्गत उन्होंने कविताओं के साथ - 2 बहुतायत में काव्य कहानियां, काव्य लेख और काव्य कॉमिक्स की रचना की। उत्तर प्रदेश हिंदी समिति इस युवा प्रतिभावान रचनाकार को शुभकामनाएँ देती है।
— प्रादेषिक हिंदी समिति (उत्तर प्रदेश)

Monday, March 23, 2015

लेखक-कवि मोहित शर्मा (ज़हन) सूक्तियाँ




*) - किसी व्यक्ति/बात का पक्ष लेने में ज्ञान हमारी मदद भी करता है और रोकता भी है। फैसला करने से पहले विभिन्न अधिकृत-अनधिकृत घटकों से जाँचना ज़रूरी है कि उपलब्ध जानकारी का उद्गम कहाँ से हुआ है, क्योकि संभव है जिस जानकारी के बल पर हम सही-गलत का निर्णय कर रहे हों वह स्रोत से ही किसी पक्ष के स्वार्थ के लिए दूषित कर दी गयी हो।


*) - आज़ादी की लहर में दोनों रुख के बंदे बहे, 
जहाँ नर्म दल के सिपहसेलार बने खुदा...
और प्यादे तक बादशाह हो गये,
वही गर्म दल के शहीद अपने ही देश में... 
क्रांतिकारियों से गुण्डे हो गये।
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को उनकी पुण्यतिथि पर नमन !

बातों और घटनाओ का अधिकृत होना उनके लोकप्रिय होने जितना ही महत्वपूर्ण है क्योकि दुनियाभर के लोग और आने वाली पीढ़ियाँ प्रमाण के रूप में केवल दर्ज रिकार्ड्स को मानते है। धीरे-धीरे चढ़ती समय कि परतों के साथ किन्ही पीढ़ियों की विदित लोकप्रिय बातों को आगे काल्पनिक किवदंतियाँ, कहानियाँ बनते देर नहीं लगती। आवश्यकता है निष्पक्ष होकर ऐसे ऐतिहासिक कालों में सक्रीय हर घटक के अच्छे-बुरे कार्यो को पहचान कर उनसे सबक लेने की। साथ ही अनुपात देखना भी आवश्यक है, किसी घटक/व्यक्ति पर हज़ारों लोग चर्चा करें, मान्यता दें जबकि किसी समकक्ष घटक पर यह संख्या दर्जनो में हो तो दूसरा घटक अपने आप विलुप्त हो जायेगा।

*) - कंधे पर बैठे फरिश्तों के हिसाब में,

अपनों को ना सतायें….
ज़रा एहतियात रहें सोने से पहले,
सपने सिरहाने ना लगे रह जायें।

*) - Genuine citations often lack corporate-glitteriness.

*) - They say that Good ultimately wins, OK! Sir, Agreed! but the win-loss record of Good vs. Evil is like population of (Moldova vs. China).

- Mohit Sharma (Trendster)

Wednesday, March 11, 2015

सिर्फ दस सवाल | लेखक मोहित शर्मा (ज़हन)



सिर्फ दस सवाल

यह एक लेख या पोस्ट से ज़्यादा एक विनती है आप सभी से। देश और दुनिया इतने विस्तृत है कि हर स्थान के हर पक्ष की जानकारी रखना असंभव है। गूगल-इंटरनेट पर निर्भरता के कारण पहले जो थोड़ा बहुत ज़ोर देते थे वो भी नहीं देते। पर ऐसे कुछ पक्ष है जिनकी जानकारी ना होना चिंताजनक और शर्म की बात है। अक्सर लोगो से किसी विषय पर बात करते हुए दुख होता है कि अपने देश से जुड़े ज़रूरी मुद्दों पर अज्ञानता, अरुचि के भाव रखते है। इसी अरुचि और अज्ञान का लाभ ऊँचे ओहदों पर आसीन, राजनैतिक और सामाजिक रूप से शक्तिशाली लोग बरसो से उठाते आये है। लोगो को समझाने पर जवाब मिलता है कि अब दुनिया भर की बातों में क्या-क्या याद रखें, कहाँ-कहाँ सर खपायें? प्रकृति से एक औसत मनुष्य को इतना दिमाग मिला है कि उसमे अनेको  ज्ञानकोष समां जायें। अड़चन ज्ञान की अधिकता की नहीं है, अड़चन है कि आम जनता का ध्यान कहाँ केंद्रित है। अब सीरियल्स, फिल्में, सेलेब्रिटीज़, मनोरंजन, खेलों में ध्यान रहेगा तो बाकी बातें अपने आप ज़हन से ओझल हो जायेंगी और यहाँ मतलब मनोरंजन आदि की आदतों को ख़त्म करना नहीं बल्कि उन्हें कम या संतुलित करना बाकी पहलुओं के अनुपात में क्योकि अगर आसाम, लक्ष्यद्वीप, केरला आदि राज्यों से कोई खबर आये तो वो किसी पराये देश से आई खबर प्रतीत ना हो। तो आप सभी से निवेदन है कि कम से कम इन 10 विषयों और सवालो पर अधिक से अधिक जानकारी लेकर खुद को जागरूक रखें, अपने आस-पास लोगो को भी जागरूक करें। 

1) - देश का वर्तमान नक्शा क्या है और कैसे कट-छंट कर वर्तमान रूप में आया ?
2) - भारत की आंतरिक भाषायी राजनीती। हिंदी से बाकी स्थानीय भाषाओं का घर्षण, अन्य भाषाओँ का आपस में घर्षण और उपजे दुष्परिणाम। 
3) - 1947 से 1991 का लाइसेंस राज समय, जब सरकारी पाबंदियां अधिक थी। उस दौर में अन्य देशो से रिश्ते। 
4) - किन देशो से हमारी सीमा साझा होती है और उनसे हमारे कैसे संबंध रहे है, चल रहे है? 5) - भारत के विभिन्न क्षेत्रों में फैली सामाजिक समस्याएँ। 
6) - किन वस्तुओं, सेवाओं में भारत अग्रणी देशों में आता है (किन चीज़ों, स्थानो में सम्भावनाएँ है) और किन बातों में भारत दूसरे देशो पर निर्भर है ?
7) - भारत में जनसँख्या का किस अनुपात में बंटवारा किन धर्मो में है और उन धर्मो का उद्गम, विस्तार किस तरह हुआ?
8) - देश का युद्ध इतिहास। 
9) - राजनैतिक पार्टियों का इतिहास। 
10) - दुनिया के प्रमुख देशो के व्यावसायिक समीकरण। 

वैसे तो महत्वपूर्ण विषय, बातें और भी बहुत है पर अधिकतर की धुरी यह विषय है। जय हिन्द! 

- मोहित शर्मा (ज़हन) 
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Tuesday, March 10, 2015