Mohit Trendy Baba's few lucky saved works from defunct websites, forums, blogs or sites requiring visitor registration....

Saturday, June 25, 2016

Mail Drafts 2008 Stories

आज 2 पुराने मेल ड्राफ्ट्स दिखे जिनमे ये कहानियां थी। इनसे संतुष्ट तो नहीं हूँ पूरी तरह क्योकि रिसर्च और सही प्रारूप की कमी लग रही है पर फिर भी यहाँ शेयर कर देता हूँ।  


1. मुफ्तखोर

जिला न्यायालय के बाहर एक व्यक्ति को कुछ मीडियाकर्मी घेरे खड़े थे। 

पत्रकार - "जैसा हमने ब्रेक से पहले दर्शकों को बताया कि अभिनेता-कॉमेडियन हरबंस जी ने नामी कॉमेडियन सुखबीर पाल पर अपने 4 चुटकुले चुराने का केस दायर किया है। अब वो हमारे साथ हैं, हरबंस जी सभी जानना चाहते हैं हैं कि सिर्फ 4 चुटकुलों के लिए आपने सुखबीर पाल जी पर केस क्यों डाला। इतना तो आपको उन 4 चुटकुलों से मिलता नहीं जितना आप अब भाग-दौड़ में गंवा देंगे?"

हरबंस - "बात पैसों की न होकर सही-गलत की है। एक सच्चा कलाकार वर्षों तक अपनी विधा में मेहनत कर अलग स्टाइल, कंटेंट खोजता है जबकि सुखबीर पाल जैसे लोग एक ऐसे सॉफ्टवेयर (एग्रीगेटर) की तरह होते हैं जो अपना समय सिर्फ अन्य कलाकारों खासकर छोटे या स्थानीय मंच वाले कलाकारों की कला चुराकर पेश करने का काम करते हैं। केवल मैं ही नहीं उनके शोज़ में अन्य हास्य अभिनेताओं का छिटपुट काम दिख ही जाता है। हम लोग 2-4 शहरों में रोज़ी के लिए बुढ़ापे तक दौड़ते रहते हैं और इन्हे देश-दुनिया में लोग राजा बना देते हैं फिर एक दिन किसी पार्टी में हमारे किसी किस्से या पंच पर पीछे से कोई गाली देते हुए कहता है ये तो फलाने सुपरस्टार का उठा लिया मुफ्तखोर ने! पते की बात यह है कि सब पता होते हुए भी, दुकानदार से मोल-भाव में झूझते हुए, पत्नी-बच्चों को बेहतर जीवन न दे पाने पर उनसे नज़रे चुराने के बाद भी हम लोग सफलता का ऐसा रास्ता नहीं अपनाते क्योकि...दिल नहीं मानता।"

 समाप्त!

=============

2. सुधार

आज के मुख्य समाचार पर 2 भाइयों की नज़र थी, "वर्षो से पीड़ित AZ वर्ग को फलाना क्षेत्र में 50% कोटा मिला, जहां पहले उनकी भागीदारी केवल 28% थी और XW वर्ग का वर्चस्व था।

भरत - "वाह! यह तो अच्छी खबर है, समान अधिकार सबका हक़ है।"
सुमंत - "खबर तो अच्छी है पर कुछ चिंता का विषय भी हैं।"
भरत - "आप फैसले से खुश नहीं, हम XW वर्ग से हैं कहीं इसलिए तो आप परेशान नहीं?"
सुमंत - "ऐसी बात नहीं है। बात यह है कि एक क्षेत्र में 2 वर्गों के बीच अंतर कई सदियों से बना है जिसको एकदम से अगर बराबर करने की कोशिश की जाएगी तो देश पर और भावी पीढ़ियों पर बहुत दबाव पड़ेगा। दोनों वर्गों में उस काम और क्षेत्र के प्रति जो मानसिकता है उसके कारण AZ वर्ग में उस क्षेत्र से जुड़ी शैक्षिक योग्यता, अनुभव और कौशल काफी कम है। इस आदेश के बाद 50 प्रतिशत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ज़बरदस्ती कम योग्य लोग लिए जाएंगे जिसका असर ना केवल इस क्षेत्र पर बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। साथ ही XW वर्ग के कई योग्य उम्मीदवार रह जाएंगे, क्योंकि यहाँ हज़ार-डेढ़ हज़ार लोगो की नहीं लाखों-करोड़ों लोगो की बात हो रही है।"

भरत - "तो इसका समाधान क्या होना चाहिए?"
सुमंत - "28 प्रतिशत की वर्तमान भागीदारी में हर सीजन 2-3 प्रतिशत कोटा बढ़ायें ताकि उचित संख्या में भागीदारी होने तक देश पर अतिरिक्त दबाव ना पड़े। नहीं तो यहां वही हाल होगा कि गांव के नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी की बात चली और प्रधान ने सीट छोड़ी तो बेचारी गरीब महिलाओं को किसी ने नहीं पूछा बल्कि प्रधान की पत्नी ही गांव की नई प्रधान बन गई और खानापूर्ति के लिए सरकारी रिकॉर्ड में दिखा दिया कि यह गांव एक महिला के नेतृत्व में है। तो धीरे-धीरे पहले नींव मजबूत हो फिर आगे काम किया जाए।"

समाप्त!
- मोहित शर्मा ज़हन

No comments:

Post a Comment