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Sunday, July 24, 2016

99 का फेर (कहानी) #mohitness


एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में उच्च पद पर कार्यरत हितेश कंपनी की तरफ से मिले टूर पर अपने माता-पिता को यूरोप के कुछ देश घुमाने लाया था। टूर के दूसरे दिन उसके अभिभावक सूरज कुमार और वीणा गहन विषय पर चिंतन कर रहे थे। 

सूरज कुमार - "टूर तो कंपनी का है पर फिर भी यहाँ घूमने-फिरने में काफी खर्चा हो जाएगा।"

वीणा - "हाँ! कल लंच का बिल देखा आपने? ऐसे तो इन 15 दिनों के टूर में हितेश 2-3 लाख खर्च कर देगा। आज से कम से कम लंच का खर्च तो बचा ही लेंगे हम...तुम्हे पता नहीं मैं घर से क्या लायी हूँ?"

कुछ देर बाद हितेश के कमरे के बाहर होटल स्टाफ के कुछ लोग खड़े थे। वीणा ने लंच बचाने के लिए कमरे में ही मैगी नूडल बनाने का प्रयास किया, जिसकी गंध और धुआं आने पर हाउसकीपिंग ने होटल मैनेजर को रिपोर्ट किया। मैनेजर को भारी-भरकम जुर्माना चुका कर हितेश सहमे हुए माँ बाप के पास पहुंचा। 

हितेश - "किसके लिए बचा रहें है आप लोग पैसा और कब तक बचाते रहेंगे? बिना पैसे का बोझ रखे सांस लेना कितना मुश्किल है? लाखो में कमाता हूँ और अगर निठल्ला होता तब भी बैठ कर खाता पूरी ज़िन्दगी, इतना पैसा-प्रॉपर्टी सब जोड़ रखा है आप दोनों ने! कम से कम जीवन के एक पड़ाव में तो इस निन्यानवें के फेर से निकलिए। मैं आपका बच्चा हूँ और मुझे यह बात बतानी पड़ रही है आपको जबकि उल्टा होना चाहिए। आपको पता है यह होटल, घूमना, प्लेन की टिकट सब मैंने खरीदा क्योकि मुझे पता था अगर टूर कंपनी की तरफ से न बताता तो आप लोग कोई न कोई बहाना बना देते।"

फिर हितेश और उसके माता-पिता ने पिन ड्राप साइलेंस में मैगी खायी। 

समाप्त!
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- मोहित शर्मा ज़हन

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