अंतरजाल की दुनिया और जीवन में मोहित शर्मा 'ज़हन' के बिखरे रत्नों में से कुछ...
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Tuesday, July 19, 2016

टप...टप...टप...(हॉरर कहानी) #mohitness


चन्द्रप्रकाश को पानी बहने से चिढ थी और पानी बहना तो वो सह लेता था पर कहीं से धीमे-धीमे पानी का रिसना या नल से पानी टपकना...

टप...टप...टप...

जैसे हर टपकती बूँद उसके मस्तिष्क पर गहरे वार करती थी। जब तक चन्द्रप्रकाश पानी का टपकना बंद न कर देता तब तक वह किसी बात पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता था। कभी भी 1 मिनट से ज़्यादा नहीं हुआ होगा जो वह पानी बहने पर दौड़कर नल बंद करे न गया हुआ। अगर कुछ ही सेकण्ड्स में कोई बात सिर में दर्द करने लगे तो किसी की भी प्रतिक्रिया ऐसी ही होगी। 

टप...टप...टप...

एक छुट्टी के दिन वह घर में अकेला था और बाथरूम की टंकी बहने लगी। वह अपनी धुन में तुरंत उसे बंद कर आया। फिर एक-एक कर के घर के सभी नल बहते और वह खीज कर उन्हें बंद कर आता। एक-दो बार उसे भ्रम हुआ की बाथरूम में या बाहर के नल के पास उसने किसी परछाई को देखा पर मोबाइल पर व्यस्त उसने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।

टप...टप...टप...

लो हद ही हो गयी, अब रसोई का नल चलने लगा। चन्द्रप्रकाश के सिर में दर्द शुरू हो चुका था, उसने रसोई की टंकी कसकर बंद की और मुँह उठाया तो देखा दीवार से चिपकी चिथड़े हुए शरीर और सफ़ेद रक्तरहित चेहरे वाली लड़की उसको घूर रही है। डर के झटके से चन्द्रप्रकाश पीछे जाकर गिरा। लड़की ने हल्की मुस्कान के साथ नल थोड़ा सा घुमाया...

टप...टप...टप...

अब चन्द्रप्रकाश का दिमागी मीनिया और सामने दीवार पर लटकी लड़की का डर आपस में जूझने लगे। अपनी स्थिति में जड़ हाथ बढ़ाये वह खुद से ही संघर्ष कर रहा था। 

टप...टप...टप...

हर टपकती बूँद लावे की तरह सीधे उसके दिमाग पर पड रही थी। कुछ ही देर में उसका शरीर काफी ऊर्जा व्यय कर चुका था। 

टप...टप...टप...

किसी तरह घिसटते चन्द्रप्रकाश ने लड़की से नज़रें बचाते हुए टंकी बंद की और निढाल होकर गिर गया। अचानक लड़की गायब हो गयी, चन्द्रप्रकाश को लगा कि उसने अपने डर पर विजय पा ली लेकिन तभी पानी बहने की आवाज़ आने लगी और अत्यधिक मानसिक-शारीरिक दबाव में चन्द्रप्रकाश के दिमाग की नस फटने से उसकी मौत हो गयी। अपने जीवन के आखरी क्षणों में उसने जो पानी की आवाज़ सुनी वो बाहर शुरू हुई बारिश की थी पर कमज़ोरी के कारण उस आवाज़ में उसका दिमाग अंतर नहीं कर पाया। 
नल से पानी फिर टपकने लगा। 
टप...टप...टप...

समाप्त!

- मोहित शर्मा ज़हन