अंतरजाल की दुनिया और जीवन में मोहित शर्मा 'ज़हन' के बिखरे रत्नों में से कुछ...

Saturday, August 4, 2018

दांव #poetry #zahan


रोटी के रेशों में चेहरा दिखेगा, 
उजली सहर में रंग गहरा दिखेगा। 
सच्चे किस्सों पर झूठा मोल मिलेगा,
बीते दिनों का रास्ता गोल मिलेगा। 

किसको मनाने के ख्वाब लेकर आये हो?
घर पर इस बार क्या बहाना बनाये हो?
रहने दो और बातें बढ़ेंगी,
पहरेदार की त्योरियां चढेगीं। 
चलो हम कठपुतली बनकर देखें,
जलते समाज से आँखें सेंके। 

हाथों की लकीरों में उलझ जाएगा,
हमें बचाने भी कोई हमसा ही आएगा। 
फिर ना निकले कोई सिरफिरा,
तमाशबीनों का मज़ा किरकिरा। 

कुछ तो मन बनाना पड़ेगा,
नहीं तो अपना कर्ज़ा बढ़ेगा। 
चाल चलकर देख ही लो...
हाथ तो दोनों सूरत में मलना पड़ेगा। 
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#ज़हन

One of the Introductory poems by yours truly - Ibadat Ishq ki (Book) by Vikas Durga Mahto

Friday, August 3, 2018

कौवों का हमला Novel credits


यह अजय जी का बडप्पन है कि उन्होंने मेरी छोटी सी मदद पर आभार व्यक्त किया। उनकी पुस्तक "कौवों का हमला" अमेज़न किंडल पर उपलब्ध है। (Book Link) वैसे किताब बच्चों के लिए है पर इसकी कहानी का रस हर आयु वर्ग के पाठक को भायेगा। शुभकामनाएं!


Wednesday, May 30, 2018

क्यों कहते हैं? (लघुकथा) #ज़हन


चाय की दुकान पर नये-पुराने ग्राहकों के बीच एक ऐसा ग्राहक कुक्कू जिसे दोबारा कभी उस जगह नहीं आना था। कुक्कू के साथ उसकी रूसी गर्लफ्रेंड डेना भी थी। 

कुक्कू - "ओए! 2 चाय, एक खस्ता बना।"

चाय वाला  - "ठीक है सर।"

कुक्कू - "....और सुन बे! अच्छी चाय ज़्यादा दूध वाली साथ में खस्ता बड़ा वाला एक्स्ट्रा चटनी के साथ।"

चाय वाला  - "अच्छा!"

इसके बाद दुकानदार खुद से बड़बड़ाया। - "क्यों? औरों से ज़्यादा पैसे दे रहे हो जो सब एक्स्ट्रा चाहिए?"

कुक्कू साहब ने बड़बड़ाहट में अपनी तौहीन सुन ली थी। तुरंत कुपोषित चाय वाले की रसीद काटने के लिए उसका कॉलर पकड़ लिया। 

"हरामखोर! उतना बोल जितना है। इतना ग़लत कमाते हो तुम लोग...."

चाय वाला - "नहीं पीनी तो मत पियो, साब! गाली क्यों दे रहे हो? किसी भी सरकारी या प्राइवेट दफ्तर में चले जाओ....पूरी दुनिया ही ग़लत कमा रही है।"

कुछ हिन्दी और हाव-भाव समझ रही डेना ने कुक्कू से पूरी बात समझनी चाही। जब कुक्कू ने बात समझायी तो डेना बोली -
"चाय वाला सही तो कह रहा है। जैसा दाम, वैसा काम...या तो फिर सभी को हमारे जैसा सर्व करे या हमें सबके जैसी चाय और खस्ता परोसे।"

कुक्कू झुंझला कर बोला - "नहीं बेबी, तुम समझ नहीं रही हो। ऐसा यहाँ कहते हैं..."

डेना का मासूम सवाल - "क्यों कहते हैं?"

समाप्त!
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Art - Tina K.

Saturday, April 7, 2018

तन-मन का वहम (कहानी) #ज़हन

Art - Azika H.

एक अंधेरे गलियारे में विजय बेचैनी से घूम रहा था। दूर अपनी पत्नी जीवा की परछाई देख उसकी उलझन कुछ कम हुई। 
"बड़ी देर लगा दी इस बार?"

जीवा - "हाँ, अमीर लोगों में रिश्तेदार तो कम होते हैं पर उनके चेले-चपाटो की भीड़ इतनी रहती है कि समय लग गया।"

जीवा अपनी पहचान बदल कर एक निजी अस्पताल से जुड़वाँ बच्चे चोरी कर लायी थी। दोनों की अपेक्षा से उलट काम जल्दी और आसानी से हो गया। कुछ दिन शांत रहने के बाद डीलर से एकसाथ दो बच्चों का बढ़िया दाम मिलने की उम्मीद थी। 

उसी रात जीवा ने विजय को जगाया। 

"सुनो मेरा मन कुछ अजीब सा हो रहा है। तबियत ख़राब लग रही है। तुम्हे पूरे शरीर में खुजली नहीं हो रही?"

विजय - "हाँ, हरारत सी तो लग रही है। मैं तुझसे पूछने ही वाला था।"

जीवा ने संकोच से पूछा - "कहीं किसी ने बददुआ तो नहीं दे दी? कोई छाया-प्रेत ना छोड़ दिया हो..."

विजय - "हाँ! 2 दर्जन बच्चे उठाने के बाद तो जैसे तुझे बड़ी दुआएं मिली होंगी। शायद मौसम बदलने का असर होगा। अभी गोली ले लेते हैं...सुबह देखेंगे।"

सुबह दोनों के हाल ख़राब हो गये थे। जगह-जगह चकत्ते पड़ गये थे, तेज़ बुखार और हरी-नीली नसें बाहर आने को थी।

जीवा - "देखो मैंने कहा था ये किसी ऊपरी आत्मा का प्रकोप है। दोनों बच्चे एकदम ठीक हैं। अभी भी समय है, हम बच्चे लौटाकर माफ़ी मांग आते हैं।"

हर पल बिगड़ती हालत में विजय और जीवा को यही सबसे सही उपाय लगा। बच्चा चोर व्यापार चैन के दोनों मज़दूर, बच्चों को लेकर अस्पताल गये। जल्द ही पुलिस के साथ बच्चों के घरवाले आ गये। जीवा और विजय बच्चों के अभिभावकों से अपने कर्मों की माफ़ी मांगने लगे और खुद से ऊपरी छाया हटाने की विनती करने लगे। तब हवलदार ने उन्हें बताया - "तुमपर कोई प्रेत-व्रत नहीं है। यह युगल अफ्रीका के देश घाना से लौटा हैं। जहाँ से लौटते हुए इन्हे वहाँ फैल रहा रोटोला रोग हो गया है। स्त्री के गर्भवती होने, शुरुआती लक्षण गंभीर होने के कारण दंपत्ति इस अस्पताल में भर्ती हो गया और संयोग से उसी दिन ये दो बच्चे हो गये। माँ से यह संक्रमण बच्चों में आ गया। अगले दिन रोटोला के सही इलाज के लिए इन्हे शहर के बड़े हॉस्पिटल भेजा जाना था कि उस से पहले ही तुमने बच्चे उठा लिये।"

विजय ने अपनी चुसी हुई काया की शक्ति जुटाकर पूछा - "...तो ये बच्चे कैसे ठीक थे?"

हवलदार - "ठीक नहीं थे, उनपर दवाई की भारी डोज़ का असर था इसलिए पूरे लक्षण पता नहीं चल रहे थे।"

 वैसे गलती दोनों की थी पर खीजते विजय का मन जीवा को थप्पड़ मारने का था...उसमें अब शक्ति कहाँ थी।

समाप्त!
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Sunday, February 25, 2018

Friday, February 16, 2018

Motion Poster and Sketch Poster of Upcoming Short Film Kathputli (A Struggle for Control)


Motion Poster


Sketch Poster

आगामी शार्ट फिल्म कठपुतली का मोशन पोस्टर और स्केच पोस्टर, Team: Anuraag Tripathi, Ankerarchit Singh, Mohit Sharma Trendster, Ankita Tripathi, Ashutosh Saxena, Kamal Joshi #freelance_talents

Also available: Facebook, Vimeo, 4Shared, Tumblr, Mediafire etc.

Official Trailer - Kathputli: A Struggle for Control (Short Film) | Freelance Talents