Interviewer - Somya Mohan Sharma (The Drawing House)
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अंतरजाल की दुनिया और जीवन में मोहित शर्मा 'ज़हन' के बिखरे रत्नों में से कुछ...
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Sunday, August 24, 2025
Sunday, October 22, 2017
Updates
*) - Chosen as one of the top writer by Dawriter website.
*) - My article about Sooraj Pocket Books and Novelist Shubhanand (Jagran Junction)
*) - Over 900 points now, Google Maps Local Guides Program
*) - DD Birthday Wish :)
*) – 6 new podcasts on lyrical comedy, noise pollution and art. – SoundCloud Profile
*) – Retired from MMO The Wrestling Game S3 World #39 (August 2017) 
*) – Kavya Comics series featured by Nazariya Now
*) – COP Exclusive Interview
Wednesday, August 3, 2016
Interview with Writer Anurag Kumar Singh
Originally Published - http://www.culturepopcorn.com/
श्री अनुराग कुमार सिंह पिछले 8 वर्षो से राज कॉमिक्स के साथ जुड़े हुए हैं। इस बीच उन्होंने कई कॉमिक्स की परिकल्पना, संपादन और लेखन में योगदान दिया। जनवरी 2008 के एक इवेंट में इनसे मिला और पाया कि अनुराग जी एक मृदुभाषी, हँसमुख, मिलनसार व्यक्ति है, जो निरंतर अपनी प्रतिभा को निखारने और नए आईडिया सोचने में लगे रहते हैं। कहानी गढ़ने और सीन-अनुक्रम जोड़ने का इनका तरीका मुझे काफी पसंद है। हालांकि, जितने परिकल्पनाओं का इनके पास भंडार है उस अनुपात में कॉमिक नहीं आयी है अबतक पर आशा करता हूँ आने वाले समय में वो इसकी भरपाई कर देंगे। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश। - मोहित शर्मा ज़हन
Q) - अपने बारे में बताएं - आपका बचपन, शिक्षा, गांव-शहर, ननिहाल आदि।
अनुराग - मेरा नाम अनुराग कुमार सिंह है! मैं किशनगंज, बिहार का रहने वाला हूँ! मेरी प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा मेरे ननिहाल पूर्णिया में हुई है! वहीँ मेरा बचपन बीता है! मैंने रसायन शास्त्र से स्नातक किया है! और अब राज कॉमिक्स के लिए कहानियां लिखता हूँ!
Q) - कॉमिक्स प्रेम कब जागा और आपकी पहली कॉमिक कौनसी थी?
अनुराग - कॉमिक्स के प्रति प्रेम मेरे अंदर 7 साल की उम्र में ही जाग गया था! मेरे घर में सभी कॉमिक्स नॉवेल्स और पत्र पत्रिकाओं को पढ़ने के शौक़ीन रहे हैं! मेरे पापा फैंटम और मेंड्रेक के फैन रहे हैं! मेरे ननिहाल में भी सभी ऐसे ही रहे हैं! सो मुझे भी पढ़ने की लत शुरू से ही लग गई! मेरी पहली कॉमिक ताऊ जी की कोई कॉमिक्स थी जिसका नाम मुझे याद नहीं है! उसके बाद चाचा चौधरी और डायमंड के अन्य किरदार भी पढ़ लेता था! राज कॉमिक्स की पहली कॉमिक्स जो मैंने पढ़ी थी वो थी कातिलों का क्लब जिसका अगला भाग आज तक नहीं पढ़ पाया! नागराज की पहली कॉमिक जो मैंने पढ़ी थी वो थी प्रलयंकारी मणि और शंकर शहंशाह! तब मुझे पता भी नहीं था कि नागराज क्या चीज है!
Q) - आपके पसंदीदा किरदार कौन हैं और क्यों?
अनुराग - मेरा पसंदीदा किरदार है परमाणु जो हमेशा से मेरा प्रिय किरदार रहा है! इसको लिखने की अतृप्त इच्छा अब भी मेरे मन में दबी है! हालाँकि मल्टीस्टार कॉमिक्स पुनरुत्थान और विस्तार सीरिज़ में मैं परमाणु को लिख चुका हूँ पर सोलो में अब तक कोई मौका नहीं मिल पाया है मुझे! इसको पसन्द करने के कई कारण है! एक तो ये विज्ञान से जुड़ा किरदार है और मैं खुद भी विज्ञान का छात्र रहा हूँ तो इसके प्रति मेरा झुकाव स्वभाविक है! दूसरा मनु जी ने परमाणु/विनय और उनके सभी किरदारों को इतने सुंदर तरीके से चित्रित किया है कि कोई भी कॉमिक रीडर इससे सहज ही जुड़ जायेगा! तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण है कि परमाणु की स्टोरीज और आर्ट का जो स्टैंडर्ड हुआ करता था उसके नीचे गिरने की जो फ्रस्टेशन थी उसने मुझे परमाणु की कहानियों से और ज्यादा जुड़ने और उसे ठीक करने के लिए प्रेरित किया! आप ऐसा भी कह सकते हैं कि मेरे राइटिंग के क्षेत्र में आने का कारण सिर्फ और सिर्फ परमाणु ही था!
Q) - लेखन के क्षेत्र में कैसे कूदना हुआ?
अनुराग - उपरोक्त प्रश्न में मैं ये बता ही चुका हूँ कि लेखन के क्षेत्र में आने का का कारण क्या था! सन 2006 में राज कॉमिक्स ने फोरम की शुरुआत की थी! फोरम से जुड़ने के बाद मुझे मेरे जैसे अन्य मित्र मिले जो राज कॉमिक्स के वर्तमान स्थिति से नाखुश थे! वो उनको सुझाव देते शिकायतें करते! हम आपस में बहस करते! उनमें से कुछ स्टोरी भी लिखते थे! उनको देख कर मेरे अंदर का राइटर भी बाहर आने को आतुर होने लगा! पर एक पूरी स्टोरी लिखनी मुझे आती नहीं थी और नेट के साधन भी सिमित थे! इसलिए मैं सिर्फ शॉर्ट में आइडियाज लिख कर देता था! तब 2008 में फैन मीटिंग में शामिल होने दिल्ली जाने का मौका मिला! जहाँ संजय जी से मिलने के बाद पक्का मन बना लिया कि अब राइटर ही बनना है! और फिर उसके कुछ महीनों बाद ही मैंने राज कॉमिक्स ज्वाइन कर लिया!
Q) - राज कॉमिक्स फोरम के दौर के बारे में नए पाठकों को बताएं।
अनुराग - फोरम के बारे में क्या कहूँ? जितना भी कहूंगा कम लगेगा! ये एक ऐसा मंच था जो हम जैसे पाठकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं था! इस मंच ने मुझे खुद को व्यक्त करना सिखाया! अपनी भावनाओं को जाहिर करने का इससे अच्छा मंच हो ही नहीं सकता! नहीं तो इससे पहले कॉमिक पढ़ कर जो भी विचार मन में आते थे वो मन में ही घुमड़ते रहते थे किसी प्रेत की तरह! कहने को बहुत कुछ होता था पर कोई सुनने वाला नहीं होता! फोरम में कई अच्छे दोस्त मिले जो मेरी तरह समान रूचि रखते थे! जिनके साथ खुल कर अपने विचार रख सकता था! बहस कर सकता था!
Q) - जीवन और लेखन में किन कलाकारों, लेखकों और लोगो को अपना आदर्श मानते हैं?
अनुराग - राइटिंग में अनुपम जी, वाही जी और संजय जी को मैं अपना आदर्श मानता हूँ! आर्टिस्ट में अनुपम जी, मनु जी का कोई तोड़ नहीं है!
Q) - अबतक की आपकी सर्वश्रेष्ठ रचना किसे मानते हैं?
अनुराग - जलजीवनी को मैं अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना मानता हूँ! ये कहानी मैंने बहुत मन से लिखी थी और भेड़िया से मानसिक जुड़ाव होने के बाद ये एकमात्र ऐसी स्टोरी है जिसकी परिकल्पना और लेखन सबकुछ मेरा अपना था!
Q) - कई पाठकों को शिकायत है कि आपका काम काफी कम देखने को मिलता है, उनसे क्या कहेंगे?
अनुराग - इसको आप मेरा आलस्य कह सकते हैं या मन की दुविधा! जब तक कोई कांसेप्ट मुझे रोमांचित नहीं करता मैं उससे जुड़ नहीं पाता! मैंने बेमन से भी कई बार लिखने की कोशिश की है पर या तो वो पूरी नहीं हो पाती या फिर आशानुकूल नहीं होती!
Q) - आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में कुछ बताएं।
अनुराग - सर्वनायक विस्तार की आगामी कहानी पर काम कर रहा हूँ!
Q) - युवा लेखकों के लिए आपके क्या सुझाव हैं?
अनुराग - एक ही सुझाव है एडिटिंग प्रोसेस से भयभीत न हों! आपकी कहानी कितनी भी अच्छी हो उसमें गड़बड़ियां सम्भव है! उनको दूर करके ही आपका बेस्ट बाहर आयेगा! इसलिए बीच में ही कोशिश करना बन्द न करें!
Q) - कॉमिक्स परिदृश्य में आपके आने के बाद से क्या बदलाव महसूस किये?
अनुराग - कॉमिक्स अब सहज रूप से उपलब्ध नहीं होता! और अब ये आम लोगों की पहुँच से दूर हो चुका है!
Q) - कॉमिक बेस के सिकुड़ने का क्या कारण है और आपके मत में स्थिति में किस तरह सुधार किया जा सकता है?
अनुराग - कई कारण है! नए रीडर्स का न जुड़ना! पुराने रीडर्स का दूर जाना! महंगा और सहज उपलब्ध न होना! कहावत है जो दिखेगा वही बिकेगा! कॉमिक्स कैरक्टर्स का एनिमेशन, टीवी सीरीज या मूवीज में न आ पाना! सुधार के लिए सबसे जरूरी है नए रीडर्स को जोड़ना! इसके लिए मोशन कॉमिक और एनिमेशन बननी चाहिए। बुक फेयर और कॉमिक कॉन जैसे इवेंट ज्यादा से ज्यादा होना चाहिए। पेंटिंग कॉम्पिटिशन जैसी एक्टिविटी द्वारा भी छोटे बच्चों को कॉमिक्स से जोड़ा जा सकते हैं।
Q) - कॉसप्ले, कॉमिक कॉमिक इवेंट्स पर आपका क्या नजरिया है?
अनुराग - कॉस्प्ले और कॉमिक इवेंट्स कॉमिक इंडस्ट्री के लिए संजीवनी का काम कर सकते हैं। पर इसे छोटे शहरों में भी आयोजित करवाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उन रीडर्स को भी कॉमिक्स से जोड़ सकें जो किन्ही कारणवश कॉमिक्स से दूर चले गए हैं।
Q) - कोई पुराना, बंद हो चुका किरदार लिखने का अवसर मिले तो किसे चुनेंगे?
अनुराग - राज कॉमिक्स में मैं निःसंदेह परमाणु को ही चुनूँगा। अगर दूसरे पब्लिकेशन की बात करूँ तो राम रहीम और तौसी।
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Location:
New Delhi, Delhi 110001, India
Tuesday, May 3, 2016
साक्षात्कार - लेखक मिथिलेश गुप्ता
लेखक मिथिलेश गुप्ता के साथ उनके हाल ही में प्रकाशित उपन्यास "जस्ट लाइक दैट" को लेकर कुछ बातें हुयी, जो यहाँ आप लोगो के साथ साझा कर रहा हूँ। यह मिथिलेश जी का दूसरा साक्षात्कार है, इस से पहले "बांकेलाल और क्रूकबांड" शार्ट फिल्म रिलीज़ होने पर उनसे बातें की थी।
*) - अपने जीवन के अब तक के सफर के बारे में बताएं।
मिथिलेश - जीवन यानी की लाइफ, कुछ खास नहीं वही एक ऐसा आम बच्चा जो कॉमिक्स के बीच पला बढ़ा ,घरवाओ से डांट सुनना और फिर भी जिद्द से कॉमिक्स पढ़ते ही जाना, स्कूल की किताबों के अंदर छुपा के कॉमिक्स पढना,, और फिर खुद की एक कॉमिक्स लाइब्रेरी बनाया और कॉमिक्स जमा करने के साथ-साथ कहानिया लिखना स्टार्ट किया , शायद तब मैं सातवी में था जब लेखनी मुझमे उभरी थी और कॉलेज आने तक 200 के आस पास शोर्ट कहानिया और १५ नोवल्स लिख चुका था और शायद आज उसी का फल ये है की मेरी कोई किताब आप लोगो के समक्ष आ पायी. शायद तब घर वालो और दोस्तों को अजीब भी लगता था की मैं बाहर की दुनिया से ज्यादा किताबों और कॉमिक्स में लगा रहता हूँ पर वो मेरे अन्दर था जो अब शायद अब आप लोग देख पायेंगे. कहते हैं ना सब कुछ एकदम से नहीं आ जाता.
*) - "एक भयानक रात" किताब पर कैसा रिस्पांस मिला आपको?
मिथिलेश - सूरज पॉकेट बुक्स के सम्पादक ‘शुभानन्द’ सर ने जब मेरी कहानिया फेसबुक में देख कर मुझे अपने पब्लिकेशन में लिखने का इनविटेशन दिया था वो मेरी जीवन का सबसे ख़ुशी का ऐसा दिन था जब मुझे बचपन से लिखी उन सारी कहानियो को लोगो के सामने लाने के लिए एक प्लेटफार्म मिल गया था. वो भयानक रात मैंने अपनी एक शोर्ट फिल्म के लिए लिखा था और सूरज पॉकेट बुक्स के लिए मैं अपने एक ऐसे नावेल पर काम कर रहा था जो शायद अब भी पूरी होना बाकी है , वो भयानक रात को जब शुभानन्द सर को भेजा तो उन्होने कहा ये नावेल के रूप में आना चाहिए और ebooks में प्रकाशित होगी तो लोग जरुर पसंद करेंगे , चूँकि कहानी ३० पन्नो की थी . पर मैं ebooks में प्रकाशन के लिए तैयार नही था. पर जब वो ebooks में रिलीज़ हुयी तो जिस आंकड़ो से वो किताबो लोगो ने डाउनलोड किया मैं हैरान रह गया. और मुझे अपने आप पर थोडा कॉन्फिडेंस भी आ गया लोगो का रिस्पांस देख कर. और ये सब हो पाया शुभानन्द सर जी की वजह से उनका विश्वास मेरी लेखनी पर. जिसने मुझे आज ३० पन्नो से २१० पन्नो की नावेल लिखने की हिम्मत दिया है .
*) - जस्ट लाइक देट किताब को लिखने का कीड़ा मन में कब और कैसे कुलबुलाया?
मिथिलेश - कीड़ा तो बचपन से ही था. जैसा मैंने कहा मैं अपने एक ड्रीम नावेल को लिखने में बिजी था और अचानक से वो भयानक रात जो शोर्ट फिल्म के लिए लिखा था ebooks में आने वाली थी. बात ये थी कि मैं अपने उस ड्रीम नावेल के क्लाइमेक्स को ख़तम नही कर पाया था उसी बीच मुझे लव स्टोरी लिखने का ख्याल दिमाग में घूम रहा था बस एक दिन शुभानन्द सर से इसका ज़िक्र किया तो वो बोले अपनी उस नावेल को ख़तम करो जो २०१३ से लिख रहे हो मैंने कहा उसका क्लाइमेक्स १० बार लिख चूका हूँ पर अच्छा नहीं बन पा रहा. मैं कुछ और लिख रहा हूँ . वो बोले ,, अब क्या ? “जस्ट लाइक दैट’ का ज़िक्र जब उनको किया तो वो कांसेप्ट का पूछने लगे और मैंने कोई प्लाट ना होने के बाद भी उस रात भर में उसका एक प्लाट बनाके उनको भेज दिया जो उनको पसंद आ गया. और फिर प्यार की किताब ‘जस्ट लाइक दैट’ जिसे मैंने अपने दोस्तों ,अपनी और अपने आसपास के युवाओ की लाइफ में हो रही प्यार की घटनाओं से लेकर लिखा है. वो कीड़ा सोते समय जागते समय और यहाँ तक की भागते समय भी कुलबुलाये जा रहा था और रात रात कई महीनो सोया नही. ऑफिस से आने के बाद भी वो लिखना जारी होता था और बस ८ से १० महीनो में जस्ट लाइक दैट तैयार हो गयी.
*) - लिखने के अलावा और क्या शौक हैं आपके?
मिथिलेश - फिल्मे देखना, कॉमिक्स पढना, डासिंग , सिंगिंग ,और छोटी मोटी एक्टिंग और मिमक्री करना. जिसमें से कुछ के examples youtube पर आप देख ही चुके हैं.
*) - लेखन किस तरह डांस और एक्टिंग से अलग है?
मिथिलेश - डांस करते समय physically काफी मेहनत करनी होती है जिसे आप जब तक पुरी तरह से फील नहीं करते बात नहीं बनती. एक्टिंग तो मैं ‘गोविंदा ‘ फेन हु शायद इसलिए थोडा सिख पाया गोविंदा को बचपन से फॉलो किआ है और जिस तरह से वो मिमक्री और डांस करते हैं और बाते बनाते हैं मैं उसे गौर से सुनते आया हूँ. मुझे अच्छा लगता है जब लोग कहते हैं अच्छी मिमक्री या एक्टिंग किया तुमने, चाहे वो कॉलेज हो या स्कूल या ऑफिस में..लेखन तो ऐसा काम है जिसमे दिमाग और दिल का होना इतना जरुरी है जितना मुझे डांस और एक्टिंग में नहीं देना पड़ता क्यूंकि वहा मैं enjoyment या कहे entertainment के लिए करता हूँ. लेखनी में अगर दिमाग और दिल साथ ना दे तो लिखना संभव नही हो पाता. एक ख़ास बात ये अलग है की आप डांसिंग या एक्टिंग जब मन करे कर सकते हो पर लेखनी मन के हिसाब से नही होती, कि भाई आज कोई काम नहीं चलो लिखता हूँ ,ऐसा नही होता. लेखनी तो किसी भी टाइम रात हो या ट्रेवल या कोई भी जगह दिमाग और दिल दस्तक देते हैं और हाथ लिखना शुरू कर देते हैं क्यूंकि वो फीलिंग बहुत जरुरी है लेखनी में जो आप लोगो को दिखाना चाहते हो.
*) - ऑफिस, घर के सदस्यों और दोस्तों की आपकी क्रिएटिविटी पर क्या राय रहती है?
मिथिलेश - ऑफिस में जब लोग बॉस के डांट या सैलरी कब आएगी के नाम पर रोते हैं मैं लिखने में बिजी होता हूँ , एक्टिंग और मिमक्री से लोगो को हँसाता हूँ, पता नहीं क्यूँ पर मैं दुखी होने पर भी कभी कभी ignore करके अपने आप में मस्त हो जाता हूँ जो मेरे ऑफिस के दोस्त और घरवाले जानते हैं और कहते हैं तू तो टैलेंटेड है भाई बहुत आगे जाएगा , हा हा हा मैं हँसता हूँ बस. सभी लोग मुझे सपोर्ट करते हैं खासकर घरवाले अब क्यूंकि पहले उनको मेरे एग्जाम की बुक्स और कॉमिक्स के बीच टेंशन होती थी कि मैं किस किताब पर हूँ, हा हा हा. खैर सबका साथ है तभी तो अच्छा लगता है ये सब करना. खासकर मेरी ‘सिम्मी दीदी’ ने हमेशा इन सब चीजों में आजतक साथ दिया है.
*) - आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में कुछ बताएं?
मिथिलेश - बताया था ना मेरा ड्रीम नावेल २०१३ से कम्पलीट नही हुआ है. वो debut नावेल होने वाला था २०१४ में अब २०१६ आ गया २ बुक्स भी आ गयी उफ्फ शायद अब नेक्स्ट वही आएगा. “ऑक्सीजन ऑफ़ लाइफ’’ आगामी प्रोजेक्ट का नाम है जो युवाओ के बीच हो रही चीजों को गहराई से दिखने का प्रयाश है जिसमे लव, इमोशन, दोस्ती, फॅमिली और करियर इन सब चीजों का ऐसा ताल मेल है जो हर युवा के साथ होती है जब वो अपने पहले जोब के लिए हाथ पैर मारने निकलता है. कभी उन्हें प्यार भी होता है, नए नए दोस्त भी मिलते हैं और फिर कुछ ऐसी घटनाएं भी कभी कभी हो जाती है जो आपकी लाइफ की उस ‘ऑक्सीजन’ को खींचने लगती है जिसके सहारे आपने अपनी लाइफ को जीने का सोचा था.
यही है ‘ऑक्सीजन ऑफ़ लाइफ’, पूर्वी , पायल और आदित्य की कहानी. मुझे इस नावेल से बहुत उम्मीद है कि लोगो को और भी ज्यादा पसंद आएगी.
*) - लेखन में आपके आदर्श कौन हैं और क्यों?
मिथिलेश - ‘तरुण कुमार वाही’ सर का मैं जबरजस्त फेन हूँ. राज कॉमिक्स में बांकेलाल ,गमराज और फाइटर toads चरित्रों के लेखक. उनकी लेखनी में जो मजेदार बात है मैं कभी किसी दूसरी कॉमिक्स में देखी ही नहीं. उसके बाद रविंदर सिंह जिनकी शुरुवातो दो नोवेल्स से ही मुझे उन्होने अपनी लेखनी की तरफ आकर्षित कर लिया. अमेरिकन राइटर Tony Abbot, ‘The secrets of droon’ जैसी फंतासी नावेल के रचयिता. ये मेरी सबसे फेवरेट बुक सीरीज है. और मेरे गुरु ‘शुभानन्द सर ‘ राजन इकबाल रिबोर्न सीरीज और जावेद अमर जॉन सीरीज के रचयिता. इनकी नोवेल्स आप जब पढेंगे तो खुद हिंदी जैसी किताबों से प्यार करने लगेंगे. बस इतना ही कह सकता हूँ इनकी किताबो और इनसे से काफी कुछ सिखा है लेखनी में और आज भी सिख रहा हूँ.
*) - सूरज पॉकेट बुक्स के साथ आपका अनुभव कैसा रहा?
मिथिलेश - जिस पब्लिकेशन ने मुझे और मेरे लेखन को एक नया आयाम एक नयी दुनिया दी है उनके बारे में क्या कहूं, शुभानन्द सर जिन्होंने २०११ में इस पब्लिकेशन का आरंभ किया था और जब मुझ जैसे नवसिखिये को खुद आगे बढ़के चांस देना और काफी कुछ सिखाना, हर कदम मदद देना, मुझे नहीं लगता शायद कही और से मेरी कहानिया प्रकाशित हो रही होती तो ,मुझे इतना कुछ सिखने को मिल भी पाता. समझिये की सूरज पॉकेट बुक्स मेरी लेखनी और किताबो का एक घर है जहाँ मैं अपने सपने को लिखता हूँ.
*) - आपके लिए काम और अपने पैशन को एकसाथ सम्भालना कितना मुश्किल होता है?
मिथिलेश - बिना मुश्किल उठाये तो रोज़ सुबह ऑफिस भी जाना मुस्किल है. लोग मुझसे कहते हैं कहा से लाता है भाई तू इतना टाइम. एक साल में दो दो किताबे और 4 शोर्ट फिल्म्स. मैं कहता हूँ टाइम तो सबके पास २४ घंटे ही है लेकिन जब आपको कोई चीज़ करना है तो वो टाइम आप खुद निकाल लेते हो, कई दोस्तों को ये भी कहते सुनता हूँ , मैं ऐसी कहानी लिखूंगा की दुनिया में मेरा इतना नाम और पैसा होगा की लोग देखेंगे ऐसे छोटे मोटे शुरुवात नहीं करना मैं तब लिखूंगा जब लोग मुझे जानते होंगे या जब मेरे पास खूब टाइम होगा. खैर ये उन सबका अपना अपना नजरिया और प्लान है मेरे मानना है. मैं अगर वाकई अपने फेम होने तक और पैसे आने तक इंतज़ार करूँगा तो क्या तब तक ये जो कहानिया पन्नो पर उकेर रहा हूँ लिख भी पाउँगा. रही बात टाइम की तो जब खूब सारा टाइम होता है न मैं तब भी नहीं लिख पाता. बिजी टाइम में ही लिखना हो पाता है. मुश्किल तो मुझे भी होती है टाइम निकालने में, कभि कम सो लेता , कभी कम बहार घूमता हूँ पर लिख लेता हूँ , जब दिल में बात आती है. खैर पैसे और नाम के लिए लिखने का ख्याल दिमाग में नहीं आता.
*) - "जस्ट लाइक देट" हमें क्यों पढ़नी चाहिए?
मिथिलेश - “Because every love story has a different angel which one is yours??” ‘जस्ट लाइक दैट’ प्यार की एक ऐसी किताब है जो शायद हम जैसे हर इन्सान के रास्ते से गुजरती ही है. नुक्कड़ या गली वाला प्यार हो या फिर कॉलेज वाला प्यार, या फिर लाइफटाइम की कसमे खाकर मरते दम तक साथ निभाने वाला प्यार हो. प्यार सबको होता है और कही न कही, किसी न किसी र्रोज़. ‘जस्ट लाइक दैट; उन सभी प्यार के रास्तो को दिखाएगी जो आपसे होकर गुजर रही होगी या फिर गुजर चुकी होगी या आने वाली होगी, सिर्फ प्यार में विश्वाश करने वालो की किताब नहीं है, बल्कि प्यार के हर पहलुओ को बताने वाली किताब है ये.
ऐसी ही तीन कहानियो का संगम है ‘जस्ट लाइक दैट’ नुक्कड़ वाला लव , कॉलेज वाला लव और लाइफटाइम वाला लव , दोस्ती प्यार ज़ज्ज्बतों और फरेब की दास्ताँ . क्यूंकि प्यार कभी भी कही भी हो सकता है ...जस्ट लाइक दैट
*) - पाठको को क्या संदेश देना चाहेंगे?
मिथिलेश - प्यार के defination को ढूंढने से अच्छा है इस एक वर्ड को इतने अच्छे से निभा लो कि प्यार वाकई प्यार बन कर रहे कोई इस पर ऊँगली ना उठाये. प्यार सिर्फ प्यार करने के लिए कभी नहीं होता बल्कि प्यार का मतलबी है साथ निभाना. अगर वही आप नही कर पाए तो आपने प्यार कभी किया ही नहीं है.??
============
(मोहित शर्मा ज़हन)
Sunday, September 22, 2013
Q & A with Courtney Dowdy (Actress-Model)
An interview with beautiful (& talented) actress Courtney Dowdy from Kentucky, United States. Enjoy! Like-subscribe-follow her profiles...
P.S. Interviewer - Yours Truly :)
Interview (Q & A) Video (Unable to attach the video on Blog) :
Courtney as Maddie (Movie : Fat Chance)
Questions sent to Courtney
"Question 1) - Who/What inspired you to become an actress & how old were you when you started acting, were you involved in musicals and plays in school?
Question 2) - Who are your Role Models or people you look up to in Acting, Modeling & Life (and Why)?
Question 3) - What is/are your favorite movie genre(s)?
Question 4) - Other Hobbies and Pastimes besides acting, modeling?
Question 5) - Tell us more about your upcoming projects?
Question 6) - Where do you see yourself 10 years from now?
Question 7) - What advice would you give to young kids who want to act?
Question 8) - Your best performance till date? (& your best youtube monologue video also)
Question 9) - Share some interesting items from your ‘Bucketlist’ & few random facts about yourself?
10) – This is a request; I liked all your monologue videos & want to see you reading my funny poem in a serious/tragic monologue mode.
Title – Just ‘Hear’ This!!
"There was a Deer,
Whose ear sensed a Bear,
Deer froze with fear,
Bear came near.
Negotiated Deer,
"Dear Bear, I have Beer, with which you can cheer."
Bear changed his mind's gear,
Bear drank beer.
and also tried to tear the deer,
Escaped Deer,
By reminding Bear,
That Bear forgot to wear his underwear."
Best Wishes!
Mohit Sharma"
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- Mohit Sharma (Trendster / Trendy Baba)
Labels:
Art,
International,
interview,
Message,
Mohit Sharma Trendster,
Mohitness,
Promotion,
Trendy Baba Mohit
Location:
Kentucky, USA
Tuesday, May 22, 2012
My Interview by Vishal Tripathi (2009)
Dated: 14 July 2009, Originally Posted - Raj Comics Forums, RC Website Community Section & Orkut Communities.
Vishal Tripathi with Mohit Sharma (Trendster / Trendy Baba)
MY NAME IS VISHAL TRIPATHI aka PERMAN. :) MANE LIYA MOHIT SHARMA JI KA INTERVIEW AUR PAROSA AP LOGO KE SAMNE LIJYE TRENDSTER(aka baba ji)KA INTERVIEW!!!! HEHEHEHEHE
1) Perman - Aapka naam?
Trendster - Mohit Sharma.
2) Perman - Aapki age? kya hai?
Trendster - 20 Saal.
3) Perman - Aap kya kaam karte hai? Apne Lekhan k baare mey bhi batayen?
Trendster - Issi saal Graduation karne kay baad MBA Entrance Exams jaise CAT, MAT, XAT, FMS, etc ki prepration kar raha hun. Waise mai writer banna chahta hun. Kuch magazines, newspapers mey rachnayen, abhivyaktiyan publish huyi hai, School-College mey bhi plays, poetry likhi aur perform ki hai. Ab dekhte hai shayad aage kabhi financially free ho paaya to fulltime writing mey aa jaaunga.
4) Perman - Aapki family ke baare mein kuch jaankaari dijiye?
Trendster - Mere Father C.I.D. ki Crime Branch mey Inspector hai, meri mommy Homemaker hai, mujhse ek 8 saal bade bhaiya aur ek 7 saal badi didi hai....dono ki shaadi last year hui...bhaiya Bharti Airtel mey engineer aur zonal manager hai.
5) Perman - Kya aapki family ne kabhi comics padhne pe apatti ki?
Trendster - Karte rehte hai....ab tak kar rahe hai...par mai kabhi maana nahi....waise mai unke saamne comics padhta bhi nahi. Ek baar jab mai 8-9 Class mey tha to mujhe chidha kar meri comic padhvane ki aadat chhudvane kay liye ghar waalo nay mera naam hi Parmanu rakh diya aur mujhe Parmanu keh kar bulane lage..unhe laga ki mai iss naam se mai chidhne lagunga par ulta mai bahut khush ho gaya aur half rate par Parmanu ki hi 5-10 comics aur le aaya ...Ab to Bhaiya aur Didi bhi nahi hai to...comics bina disturbance kay aaram se padhne ka.
6) Perman - Kya family mein aur koi comics padhta hai?
Trendster - Nahi. Haan, achchhi magazines ya books padhte hai sab log.
7) Perman - Aapne comics padhna kabse shuru kiya tha?
Trendster - 7 Saal ki age mey.
Perman - Aur wo lucky pehli comic?
Trendster - Actually, mujhe uss waqt ek bhaiya se 2 comics 'Nagraj' aur 'Aag' mili thi. Maine naam se impress hokar Nagraj pehli padhi thi.
9) Perman - Aapko kaun se comic characters pasand hai?
Trendster - Mujhe Parmanu, T.H.S., Anthony, Nagraj, Dhruva aur Gamraj pasand hai...
10) Perman - Aapke favourite artist aur story writer?
Trendster - Mujhe Bharat Negi ji as a writer bahut pasand hai. Artist mey Anupam ji, Manu ji (Edison George), Lalit Singh, achchhe lagte hai.
11) Perman - Comics se realted koi interesting ghatna batayein?
Trendster - Jab mai chhota tha to badi mushkil se toffees, etc khaane kay baad kuch paise bachte to wo bhi aaye din khelte waqt ball kho jaati thi to usme bhi dosto kay saath paise milane padte thay. Ek din mere paas 9 Rupaye thay. Mere dost nay bataya ki Rui ki Mandi mey comics half rate ki milti hai. Maine socha ki 6 ya 8 Rupaye waali 1-2 comics to half rate mey mil hi jaayengi. Mai wahan gaya par utrane par tempo waale nay 6 rupaye le liye...par mai to comics kay sapno mey khoya tha....mai book stall gaya aur wahan bahut chhantne kay baad 6 Rupaye waali ek comic half rate mey le li...par ab mere paas paise khatm ho gaye thay...maine socha chal kar ghar pahunch jaaunga par ghar bahut door tha par ab chalne kay alawa koi chara nahi tha...ghar pahunchne mey bahut dair ho gayi aur mai bahut thak gaya....waise to mai khaana khate hi so jaata par maine khaana khaane kay baad Yoddha ki wo poori comic padhi aur ek Yoddha ki tarah bed par comic kay saath hi so gaya.
Perman-ahhaahahhahehehehheheh maza a gaya hehehehhehe
12) Perman - Aapka forum se parichay kaise aur kab hua?
Trendster - Pehle to kabhi kisi project banvane kay chakkar mai hi Cyber Cafe 3-4 mahino mey jaata tha par har baar RC ki website zaroor visit karta tha. Graduation first year mey aise hi net par messenger id, orkut par id banane ka mann karne laga to Cyber Cafe aaya aur RC ki site par bhi gaya...Homepage par kuch stories aur blogs padhe...to ek-do din aur visit kiya tabhi forum par bhi click kiya aur.....bas fir sab itna achchha laga ki regular ho gaya yahan.
13) Perman - Forum aur comics ke alawa aapke aur kya shauk hai?
Trendster - Sports, G.K....Current Affairs, Stories/Plays likhna, Poetry.
14) Perman - Aapki favourite comics kaun si hai?
Trendster - Waise to list bahut lambi hai par overall mujhe Kohram ek complete comic lagti hai.
15) Perman - Aapne apna username Trendster kyon rakha?
Trendster - Mai koi unique username soch raha tha jo sunne mey achchha bhi lage aur pehle kisi nay use bhi nahi kiya ho. Tab to aesa hi tha fir baad Jazzy B aur Rihanna nay iss word ko use kiya....ek samay RC par meri profile Google search mey "Trendster" word ki search mey top par thi....fir to kuch companies nay bhi ye naam use kiya par ab bhi Google search mey top individual Trendster to mai hi hun...Thank you....ahm!!
16) Perman - Log aapko kai baar trendy baba bulate hai,
Trendster - Maine thodi masti kay liye "Forum Members in Real Harsh World" topic mey ye Trendy Baba naam kay character ko use kiya tha....Ye 2 links dekhiye. Maine inpar 4-5 Funny scenes likhe thay. Tabhi se baaki posters ko bina mehnat kay mera khud rakha-rakhaya naam mil gaya.
viewtopic.php?f=79&t=1708&st=0&sk=t&sd=a&start=150
viewtopic.php?f=79&t=1708&st=0&sk=t&sd=a&start=175
17) Perman - Forum ki kaun si baat aapko sabse zyada attract karti hai?
Trendster - Yahan comics par baat karne aur share karne ko itna kuch hai....yahan bahut se talented members bhi hai jinki stories, artworks, discussions, dekhna mujhe achchha lagta hai.
18) Perman - Forum ki koi buri baat?
Trendster - Firstly, Active Members ki sankhya abhi bhi bahut kum hai. Forum par ki gayi mehnat kay hisaab se kisi ko recognition nahi milta. Jaise yahan to aesa socha jaata hai ki "Maine kahin se sune-sunaye jokes ya kisi website se funny pics daal di to log bas usse hi dekhe aur uspar comment kare...baaki kisi kay mehnat se banaye artworks, stories, articles, etc jaaye bhaad mey...."
19) Perman - Agar aap forum mod ban jaayein
Trendster - Members badhane par aur zyada dhyaan dunga aur members ko zyada se zyada healthy discussions mey part lene kay liye encourage karunga. Achchhe topics ko inactive nahi rehne dunga. Waise 2 baar kuch dino kay liye guest mod reh chuka hun tab to kuch similar topics ko merge kiya tha bina zyada halla machaye....aur do-char jagah suggestions diye thay members ko. Issi mey time nikal gaya. Forum manage karna kaafi aasaan kaam hai.
20) Perman - Nayi released comics mein aapko kya pasand aur napasand hai?
Trendster - Mujhe NWS aur Doga ki ek kay baad ek aa rahi series baaki sab se comparatively achchhi lag rahi hai. THS bhi theek chal rahi hai. Par Amar Prem aur Bankey Lal.....nay to mujhe bahut niraash kiya....raddi pe raddi comic aa rahi hai unki.
21) Perman - Comics mein kya badlaaw dekhna chahenge?
Trendster - RC ko eksaath limited creative team kay saath itney saare projects nahi karne chahiye. Doosri baat Readers ko chhote plots par based stories ko series mey padhna bilkul achchha nahi lagta isliye stories zabardasti naa kheenche. Baaki naye talents ko thoda aur badhava de....wo fans ko to ideas dene par badhava dete hai par jab koi iss line mey aana chahta hai to uske kaam kay prati unka nazariya badal jaata hai. Log aate hai chale jaate hai...RC ko kuch khud se aesa karna chahiye ki unki permanent creative team mey T.K. Wahi ji, Anupam ji, etc....kay alawa bhi log hon....
22) Perman - Interview dene ka thanks....
Trendster - Thanks tumhara...warna khud hi interview likh kar fake id bana kar post karna padta. Ab chalo machhliyan khaate hai....
Perman-are mood nahi hai machliyo ne case kar diya mujh par agar ek aur khai to jail me chakki pessing and pessing!!!!hehehehhe
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