अंतरजाल की दुनिया और जीवन में मोहित शर्मा 'ज़हन' के बिखरे रत्नों में से कुछ...
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Wednesday, August 3, 2016

Interview with Writer Anurag Kumar Singh

Originally Published - http://www.culturepopcorn.com/

श्री अनुराग कुमार सिंह पिछले 8 वर्षो से राज कॉमिक्स के साथ जुड़े हुए हैं। इस बीच उन्होंने कई कॉमिक्स की परिकल्पना, संपादन और लेखन में योगदान दिया। जनवरी 2008 के एक इवेंट में इनसे मिला और पाया कि अनुराग जी एक मृदुभाषी, हँसमुख, मिलनसार व्यक्ति है, जो निरंतर अपनी प्रतिभा को निखारने और नए आईडिया सोचने में लगे रहते हैं। कहानी गढ़ने और सीन-अनुक्रम जोड़ने का इनका तरीका मुझे काफी पसंद है। हालांकि, जितने परिकल्पनाओं का इनके पास भंडार है उस अनुपात में कॉमिक नहीं आयी है अबतक पर आशा करता हूँ आने वाले समय में वो इसकी भरपाई कर देंगे। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश। - मोहित शर्मा ज़हन

Q) - अपने बारे में बताएं - आपका बचपन, शिक्षा, गांव-शहर, ननिहाल आदि। 
अनुराग - मेरा नाम अनुराग कुमार सिंह है! मैं किशनगंज, बिहार का रहने वाला हूँ! मेरी प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा मेरे ननिहाल पूर्णिया में हुई है! वहीँ मेरा बचपन बीता है! मैंने रसायन शास्त्र से स्नातक किया है! और अब राज कॉमिक्स के लिए कहानियां लिखता हूँ!

Q) - कॉमिक्स प्रेम कब जागा और आपकी पहली कॉमिक कौनसी थी?
अनुराग - कॉमिक्स के प्रति प्रेम मेरे अंदर 7 साल की उम्र में ही जाग गया था! मेरे घर में सभी कॉमिक्स नॉवेल्स और पत्र पत्रिकाओं को पढ़ने के शौक़ीन रहे हैं! मेरे पापा फैंटम और मेंड्रेक के फैन रहे हैं! मेरे ननिहाल में भी सभी ऐसे ही रहे हैं! सो मुझे भी पढ़ने की लत शुरू से ही लग गई! मेरी पहली कॉमिक ताऊ जी की कोई कॉमिक्स थी जिसका नाम मुझे याद नहीं है! उसके बाद चाचा चौधरी और डायमंड के अन्य किरदार भी पढ़ लेता था! राज कॉमिक्स की पहली कॉमिक्स जो मैंने पढ़ी थी वो थी कातिलों का क्लब जिसका अगला भाग आज तक नहीं पढ़ पाया! नागराज की पहली कॉमिक जो मैंने पढ़ी थी वो थी प्रलयंकारी मणि और शंकर शहंशाह! तब मुझे पता भी नहीं था कि नागराज क्या चीज है!

Q) - आपके पसंदीदा किरदार कौन हैं और क्यों?
अनुराग - मेरा पसंदीदा किरदार है परमाणु जो हमेशा से मेरा प्रिय किरदार रहा है! इसको लिखने की अतृप्त इच्छा अब भी मेरे मन में दबी है! हालाँकि मल्टीस्टार कॉमिक्स पुनरुत्थान और विस्तार सीरिज़ में मैं परमाणु को लिख चुका हूँ पर सोलो में अब तक कोई मौका नहीं मिल पाया है मुझे! इसको पसन्द करने के कई कारण है! एक तो ये विज्ञान से जुड़ा किरदार है और मैं खुद भी विज्ञान का छात्र रहा हूँ तो इसके प्रति मेरा झुकाव स्वभाविक है! दूसरा मनु जी ने परमाणु/विनय और उनके सभी किरदारों को इतने सुंदर तरीके से चित्रित किया है कि कोई भी कॉमिक रीडर इससे सहज ही जुड़ जायेगा! तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण है कि परमाणु की स्टोरीज और आर्ट का जो स्टैंडर्ड हुआ करता था उसके नीचे गिरने की जो फ्रस्टेशन थी उसने मुझे परमाणु की कहानियों से और ज्यादा जुड़ने और उसे ठीक करने के लिए प्रेरित किया! आप ऐसा भी कह सकते हैं कि मेरे राइटिंग के क्षेत्र में आने का कारण सिर्फ और सिर्फ परमाणु ही था!

Q) - लेखन के क्षेत्र में कैसे कूदना हुआ?
अनुराग - उपरोक्त प्रश्न में मैं ये बता ही चुका हूँ कि लेखन के क्षेत्र में आने का का कारण क्या था! सन 2006 में राज कॉमिक्स ने फोरम की शुरुआत की थी! फोरम से जुड़ने के बाद मुझे मेरे जैसे अन्य मित्र मिले जो राज कॉमिक्स के वर्तमान स्थिति से नाखुश थे! वो उनको सुझाव देते शिकायतें करते! हम आपस में बहस करते! उनमें से कुछ स्टोरी  भी लिखते थे! उनको देख कर मेरे अंदर का राइटर भी बाहर आने को आतुर होने लगा! पर एक पूरी स्टोरी लिखनी मुझे आती नहीं थी और नेट के साधन भी सिमित थे! इसलिए मैं सिर्फ शॉर्ट में आइडियाज लिख कर देता था! तब 2008 में फैन मीटिंग में शामिल होने दिल्ली जाने का मौका मिला! जहाँ संजय जी से मिलने के बाद पक्का मन बना लिया कि अब राइटर ही बनना है! और फिर उसके कुछ महीनों बाद ही मैंने राज कॉमिक्स ज्वाइन कर लिया!

Q) - राज कॉमिक्स फोरम के दौर के बारे में नए पाठकों को बताएं। 
अनुराग - फोरम के बारे में क्या कहूँ? जितना भी कहूंगा कम लगेगा! ये एक ऐसा मंच था जो हम जैसे पाठकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं था! इस मंच ने मुझे खुद को व्यक्त करना सिखाया! अपनी भावनाओं को जाहिर करने का इससे अच्छा मंच हो ही नहीं सकता! नहीं तो इससे पहले कॉमिक पढ़ कर जो भी विचार मन में आते थे वो मन में ही घुमड़ते रहते थे किसी प्रेत की तरह! कहने को बहुत कुछ होता था पर कोई सुनने वाला नहीं होता! फोरम में कई अच्छे दोस्त मिले जो मेरी तरह समान रूचि रखते थे! जिनके साथ खुल कर अपने विचार रख सकता था! बहस कर सकता था! 

Q) - जीवन और लेखन में किन कलाकारों, लेखकों और लोगो को अपना आदर्श मानते हैं?
अनुराग -  राइटिंग में अनुपम जी, वाही जी और संजय जी को मैं अपना आदर्श मानता हूँ! आर्टिस्ट में अनुपम जी, मनु जी का कोई तोड़ नहीं है!

Q) - अबतक की आपकी सर्वश्रेष्ठ रचना किसे मानते हैं?
अनुराग - जलजीवनी को मैं अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना मानता  हूँ! ये कहानी मैंने बहुत मन से लिखी थी और भेड़िया से मानसिक जुड़ाव होने  के बाद ये एकमात्र ऐसी स्टोरी है जिसकी परिकल्पना और लेखन सबकुछ मेरा अपना था!

Q) - कई पाठकों को शिकायत है कि आपका काम काफी कम देखने को मिलता है, उनसे क्या कहेंगे?
अनुराग - इसको आप मेरा आलस्य कह सकते हैं या मन की दुविधा! जब तक कोई कांसेप्ट मुझे रोमांचित नहीं करता मैं उससे जुड़ नहीं पाता! मैंने बेमन से भी कई बार लिखने की कोशिश की है पर या तो वो पूरी नहीं हो पाती या फिर आशानुकूल नहीं होती!

Q) - आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में कुछ बताएं। 
अनुराग - सर्वनायक विस्तार की आगामी कहानी पर काम कर रहा हूँ!

Q) - युवा लेखकों के लिए आपके क्या सुझाव हैं?
अनुराग - एक ही सुझाव है एडिटिंग प्रोसेस से भयभीत न हों! आपकी कहानी कितनी भी अच्छी हो उसमें गड़बड़ियां सम्भव है! उनको दूर करके ही आपका बेस्ट बाहर आयेगा! इसलिए बीच में ही कोशिश करना बन्द न करें!

Q) - कॉमिक्स परिदृश्य में आपके आने के बाद से क्या बदलाव महसूस किये?
अनुराग - कॉमिक्स अब सहज रूप से उपलब्ध नहीं होता! और अब ये आम लोगों की पहुँच से दूर हो चुका है!

Q) - कॉमिक बेस के सिकुड़ने का क्या कारण है और आपके मत में स्थिति में किस तरह सुधार किया जा सकता है?
अनुराग - कई कारण है! नए रीडर्स का न जुड़ना! पुराने रीडर्स का दूर जाना! महंगा और सहज उपलब्ध न होना! कहावत है जो दिखेगा वही बिकेगा! कॉमिक्स कैरक्टर्स का एनिमेशन, टीवी सीरीज या मूवीज में न आ पाना! सुधार के लिए सबसे जरूरी है नए रीडर्स को जोड़ना! इसके लिए मोशन कॉमिक और एनिमेशन बननी चाहिए। बुक फेयर और कॉमिक कॉन जैसे इवेंट ज्यादा से ज्यादा होना चाहिए। पेंटिंग कॉम्पिटिशन जैसी एक्टिविटी द्वारा भी छोटे बच्चों को कॉमिक्स से जोड़ा जा सकते हैं।

Q) - कॉसप्ले, कॉमिक कॉमिक इवेंट्स पर आपका क्या नजरिया है?
अनुराग - कॉस्प्ले और कॉमिक इवेंट्स कॉमिक इंडस्ट्री के लिए संजीवनी का काम कर सकते हैं। पर इसे छोटे शहरों में भी आयोजित करवाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उन रीडर्स को भी कॉमिक्स से जोड़ सकें जो किन्ही कारणवश कॉमिक्स से दूर चले गए हैं।

Q) - कोई पुराना, बंद हो चुका किरदार लिखने का अवसर मिले तो किसे चुनेंगे?
अनुराग - राज कॉमिक्स में मैं निःसंदेह परमाणु को ही चुनूँगा। अगर दूसरे पब्लिकेशन की बात करूँ तो राम रहीम और तौसी।

Tuesday, May 19, 2015

जासूसी जंग (Story Ad) #fanfic


जासूसी जंग (Teaser)
तिरंगा - यह सोचना बेकार है साबू कि तुम मुझे अपने आकार या हुंकार से डरा लोगे। मेरा रास्ता छोड़कर बड़ी समस्या पर ध्यान दो।
साबू - बड़ी समस्या के लिए चाचा जी मुस्तैद है, यहाँ जो तुम समस्याएँ खड़ी कर रहे हो उनका बंद होना भी आवश्यक है।
तिरंगा - ऐसा पहली बार नहीं है जो मुझे अच्छाई के बचाव के लिए अच्छाई से ही लड़ना पड़ेगा। यह भी पहली बार नहीं होगा जो मैं एक अमानवीय ताकत के धनि से दो-दो हाथ कर उसे चित करूँगा।
तभी एक फनफनाता अस्त्र हवा में लहरा और तिरंगा के कुछ समझने से पहले ही।

*टन्ननन*
तिरंगा - आईइइइइ.....

बिन्नी चाची - पर ऐसा पहली बार होगा कि एक बेलन से तेरे खोपडे में गुम्मड़ पड़ेगा, हट मेरे बच्चे से दूर।

एक तरफ है देशभक्त डिटेक्टिव तिरंगा और एक ओर है सबके चहेते (तिरंगा के भी) चाचा चौधरी !! कौन करेगा एक गहरे राज़ का पर्दाफाश और जीतेगा यह.....जासूसी जंग !!!

Sunday, November 30, 2014

कॉमिक्स से जुड़े 2 मज़ेदार किस्से - मोहित शर्मा (ट्रेंडस्टर) [Podcast]

कॉमिक्स से जुड़े 2 मज़ेदार किस्से - मोहित शर्मा (ट्रेंडस्टर) Podcast



Yahan Agra, Lucknow mey hue 2 vaakye baant raha hun aap sabke saath. Aasha hai aap sabko ye podcast pasand aayegi.

- Mohit Trendster

Tuesday, August 19, 2014

Parmanu's Atom Post Letters - Mohitness :)


Comic - I am Sorry (December 2000)


Comic - Death Dot Com (2001)

Special Thanks to Sanjay Singh for the first image. Second image I google searched the comic name. Both the issues given to fellow fans. 2 letters in RC's letter columns is a rare feat. :)

Monday, May 5, 2014

Raj Comics DJ Trendy Baba Mix


Scene Mixture 

Originally Posted - Raj Comics Forums (May 2009)



Bas itna sochiye ki alag-alag characters ki comics ka kaam mix ho gaya hai. Kirdaaro kay dialogues super-random tareeke se doosri series kay kirdaaro se mix ho gaye hai aur unka final result kuch yun hoga..........

1). Sillu - Ab fancy dress competition mey next kaun aayega...
Tiranga - Jab farr-farr fehrayega Tiranga labada....jab chakar-chakar lehrayegi Tirangi dhaal....tab aayega Tiranga. 

2). Maria - King, Doodh piyo. 
Doga - Ye kaam sirf Doga jaisa mard kar sakta hai. 

3). Probot - Kya tum mujhe sun rahe ho, Parmanu.
Kaal Paheliya - Kutta, Kutta, Kutta....
Parmanu - ...Haan, Dhanyavaad, mai tumhari baat samajh gaya.

4). Gamraj - Eve teasing yaani ladkiyon ko pareshaan karna buri aadat hai. 
Allrounder Vakra - ....Par ye to mera favorite game hai. 

5). Principal - Mujhe lagta hai ki Duniya ka sabse bada kamina hai.....
Kobi - Budha-Tudha Fujo. 

6). Bauna Vaman - Vaman hamesha ek naa ek trick bacha kar rakhta hai. 
Shankalu - Issi baat par mujhe shanka hai. 

7). Tantana - Savdhaan Kobi, mai tere tukde-tukde kar dunga. 
Jane - Par mujhe to Kobi aur Bheriya ek roop mey chahiye. 

8). Visarpi - Kya Nagraj kabhi mera nahi ho sakta....to fir mera saath kaun dega?
Inspector Steel - Mai Aapke liye, aapke saath...seva mey sadeiv tatpar...

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Isi kadi ko aage badhate hue...


Upadhi (Title) Mixture



Wonderman Shankalu,

Raat ka Rakshak Rangeela,

Daitya Putra Vikram Singh,

Farz ki Machine Shipra,

Deshbhakt..Detective Kaaldoot,

Tragedy King Tiranga,

Jungle ka Jallad C.N.N.,

Tantra aur Talwar ka dhani Fujo Baba,

Nari Shakti ki aawaz Tauki ji,

Allrounder Fhuchang. 

Yaaro, aap log bhi try karo.

Tuesday, January 7, 2014

RC Cartoons with Frank Knot (Rahul)


Nagraj - "यादों से खून चूसते वक़्त कि भी खुदगर्ज़ी होती है.... 
यादों से खून चूसते वक़्त कि भी खुदगर्ज़ी होती है.…" 

*Wah-Wah* 

*Wah-Wah*

Doga - "अंकल जी नयी शक्ति करते ईजाद... जब इनकी मर्ज़ी होती है।"

- Mohit Sharma, Frank Knot. P.S. Mera to bas ye trolling sher tha baaki setup Rahul ne socha...

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डोगा - "लहरों सी आवाज़ खाईयों मे दफन हो जाती है ...तन्हाई में ज़िन्दगी यूँ ही बीत जाती है ....."

तिरंगा - "पहले यह कन्फर्म कर की ये 'च्यूम-च्यूम-च्यूम...' की आवाज़ तेरी बन्दूक की ही है या गुस्से में कहीं और से खता हो जाती है??"

बाकी हीरोज़ - "वाह-वाह ....वाह-वाह"

RC Cartoon with Frank Knot
 — with Frank Knot. (September 2013)


Tuesday, October 1, 2013

Doga-Run (Doga ki Shaadi)


Shaadi Card by Mr. Gaurav Shrivastav for my parody story "Doga-Run" 
(Originally Posted on RC Forums May 2007)



Also published in "Heroes in Real Harsh World" eBook Series. 


























Also attaching a latest collaboration gag with artist Frank Knot (wants to remain anonymous)

डोगा - "लहरों सी आवाज़ खाईयों मे दफन हो जाती है ...तन्हाई में ज़िन्दगी यूँ ही बीत जाती है ....."

तिरंगा - "पहले यह कन्फर्म कर की ये 'च्यूम-च्यूम-च्यूम...' की आवाज़ तेरी बन्दूक की ही है या गुस्से में कहीं और से खता हो जाती है??"

बाकी हीरोज़ - "वाह-वाह ....वाह-वाह" 






































- Mohit Trendster

Tuesday, May 7, 2013

RC Visit (May 2013)

Aaj 2-3 saal baad phir RC Office gaya. Wahan Sanjay ji, Abhishek Dear, Manoj ji, Vivek Mohan ji, Hemant Bhai se mila. Achchha anubhav tha...at present RC creatives par workload bahut zyada hai. Abhishek to heera ladka hai, jitna kaho utna kum...apne Hemant Bhai to superstar hai hi, sahi se artist aur Dilli wala bana rahe hai Abhishek ko. Sanjay ji se itne gap k baad kaafi baaten hui.

Ek aur vaakya hua Vishvavidhyalay Metro se jo auto liya RC Burari jaane k liye us autowaale (Surender) ko bataya Burari jana hai....jab usko bataya ek publication hai to usne pucha Raja Pocket Books, maine haan kaha to usne bataya ki wo pehle jude wahan se kai artists ko jaanta tha...aur ab senior artist Rakesh Gurung ji k saath unke struggling days mey rehta tha...

"Jab Rakesh chatai par sota tha aur baarish k time mey paani bhar jata tha to uske liye Charpaai lata tha mai...ab to uska naam cartoono mey neeche likha aata hai, mai to Sant Nagar hi reh gaya Sahab, wo to khoob aage nikal gaya. Noida mey rehta hai shayad ab..." Baaki baaten phir kabhi....

P.S. Pata nahi kyu jo koi net par achchhe se jaanne wala banda real life mey milta hai mujhse to pehchaan hi nahi pata mujhe pehli baar mey...
 - Mohit Sharma Trendster

Saturday, January 26, 2013

Wednesday, October 31, 2012

Soumya Das : Awards & Accomplishments

Soumya is an active member of Indian Comics communities, groups, forums since 2006. Following is the list of awards, accomplishments and his contest record.

P.S. Profession - Software Engineer.



*) - Raj Comics Generation Next Writers Workshop Contest (co-winner & attended the workshop with 15 others), January 2008, judged by RC Management.

*) - Comics "Bura Bhala" (Articles-Reviews) Contest (Runner-up), September 2009.

*) - The Ultimate Writer Contest (Winner), July 2009.

*) - Forum Championship Record : Member Team C (Champions).

*) - Published

~ Comix.India (Vol. 3) : One Night at Cemetery.

~ Science Reporter Magazine (2008, 2009)

~ Comics Stolon Magazine (2010)

~ Werehouse - Mouse Trap (2011); Holy Cow Entertainment's First Issue

*) - Other Popular Works/Projects

~ Vampyre (2008)

~ Bhairavi (2010)
  
*) -  Other Names - Super Commando Bunty (SCB), SSD, Bunty, Bijuka.

 

Sunday, October 28, 2012

अपवित्र (Apavitra) [2008] Shakti

Originally Posted on RC Forums (Year 2008)

पृथ्वी पर राज करने की मंशा लेकर राक्षश ज़ाति के कुछ दानव पाताल से धरती पर आ जाते है. उन्होंने एक छोटे से द्वीप के कबीलों पर अत्याचार करके वहां के लोगो को गुलाम बना कर अपना अभियान शुरू ही किया था की उनके रास्ते मे कबीलों की पीड़ित महिलाओं की पुकार सुन कर आ गई नारी ज़ाति की रक्षक शक्ति. शक्ति के सामने उन दानवो की कोई भी युक्ति या शक्ति नही चल पा रही थी. आख़िरकार, उन दानवो को वापस पाताल भागना पड़ा.

तब वो राक्षश योजना बनाते है की शक्ति की इन बड़ी शक्तियों को ख़त्म कर दिया जाए. एक कबीले के कुल देवता को हर हज़ार सालो मे के बार 100 नारी जानवरों की बलि देने का रिवाज़ था. बलि ना मिलने पर पूरे कबीले का विनाश हो जाता. किवदंतियों के अनुसार बलि देने से रोकने वाले को भी देवता मार देते थे. दानव योजना अनुसार ये ख़बर सर्वव्यापी कर देते है जिससे शक्ति को पहले ही इस रिवाज़ का पता चल जाता है और वो बलि देने से रोक देती है. फिर उस कबीले के क्रोधित देवता प्रकट होते है. लेकिन शक्ति उन्हें कुछ क्षण रुकने को कहती है और कुछ ही देर मे वो दुनिया भर से कई मरणासन (कुछ ही seconds मे मरने वाली) जानवरों (females) को बलि के लिए ले आती है. कबीले के देवता बलि स्वीकार करके चले जाते है और उन दानवो की पहली योजना विफल हो जाती है.

उनमे से एक राक्षश को शाप था की वो जिस भी जीवित वस्तु को स्पर्श कर लेगा वो अपवित्र हो जायेगा. वो राक्षश नारियों पर अत्याचार करके शक्ति को बुलाता है और फिर शक्ति से मुतभेड करता है और मरते - मरते उसे छू लेता है. शक्ति का शरीर भी अपवित्र और निस्तेज हो जाता है और उसकी सारी शक्तियां बेहद साधारण रह जाती है. उसके बाद वो सभी दानव फिर से धरती पर आकर उन्ही कबीलों से शुरुआत करते है. शक्ति द्वारा वहां भेजे गए शक्ति के प्रतिरूप भी दानव ख़त्म कर देते है फिर वो शक्ति को भी बेबस कर देते है पर किसी तरह शक्ति वहां से बच निकलती है. दानव इसे अपनी जीत मान लेते है और अपने अत्याचारों को बढ़ा देते है और जल्द ही बहुत से कबीलों पर अपना राज फैला देते है. इस लड़ाई की वजह से उसकी शक्तियां और भी कम हो जाती है. शक्ति बहुत ही असहाय महसूस कर रही थी.

फिर वो सोचती है की गंगा जी सभी के पाप और अपवित्रता धो देती है. शक्ति की ये अपवित्रता भी गंगा नदी के स्पर्श से धुल जायेगी. लेकिन ऐसा करने से उसकी अपवित्रता गंगा जी मे मिल जायेगी. और शाप की वजह से गंगा जी के विलुप्त होने का खतरा था. शक्ति एक भक्त से गंगा जल की की थोडी मात्रा अपने लिए मांगती है और उससे अपने शरीर पर छिड़क लेती है. लेकिन उसकी शक्तियों मे इसके बाद भी थोड़ा ही सुधार हुआ था. वो बड़ी मुश्किलों से दुनिया भर की नारियों की मदद कर रही थी. तभी शक्ति को एक नारी की पुकार सुनाई देती है जिसे सती प्रथा के तहत जलाया जा रहा था. शक्ति बड़ी मुश्किल से उससे आग से बीच से निकाल कर गाँव वालो से बचाती है. लेकिन वो औरत शक्ति के हाथो मे दम तोड़ देती है. शक्ति का क्रोध जाग उठता है. तब उसे याद आता है की उस दानव ने तो सिर्फ़ चंदा रुपी उसके शरीर की खाल को छुआ था. तब शक्ति चंदा रुपी अपने शरीर की खाल को उतार कर तुंरत ही 1 क्षण मे उस मरी हुई औरत के अंश से ख़ुद पर खाल का आवरण चढा लेती है. उसके बाद उसकी सभी शक्तियां वापस आ जाती है और वो उन दानवो का अंत करती है और उन गाँव वालो को सज़ा देती है जिनकी वजह से उस मासूम औरत की जान गई थी.

The End!

Saturday, October 27, 2012

रखवाला (Parmanu) [2009]

Year 2009, posted this as a part of story idea contest hosted by RFN (Orkut), later posted it on Raj Comics Website & Forums. Delhi Commonwealth Games 2010 are now history. :) Art by Mr. Kuldeep Babbar.




दिल्ली मे 2010 मे होने वाले राष्ट्रमंडल खेलो (Commonwealth Games) की शुरुआत को कुछ ही दिन बचे है. खिलाडियों, खेल अधिकारीयों और सहायक दलों के रुकने और तैयारी के लिए खेल गाँव मे कैम्पस लगे है.

पहले ही दिन कैम्पस मे गड़बड़ और अपराध होने लगते है जैसे एक कैंप से कुछ ही देर मे फटने वाला विस्फोटक और R.D.X. मिलना, कुछ देशो के खिलाडियों का अपहरण हो जाना. परमाणु तुंरत हरकत मे आता है और अपह्रत खिलाडियों को छुडाता है और विस्फोटक को निष्क्रिय करता है.  परमाणु, विनय के रूप मे खेल गाँव मे भारतीय दल के सुरक्षा अधिकारी के रूप मे वहां रह कर इस मामले की छान-बीन शुरू कर देता है.

भारत पर अंतर-राष्ट्रिय दबाव बढ़ने लगता है और कुछ देश अपने खिलाडी वापस बुलाने की धमकी देते है. परमाणु मीडिया के सामने राष्ट्रमंडल खेलो मे आये सभी लोगो की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेता है.  उसी दिन खेल गाँव मे  सिर्फ उन देशो के कैम्पस पर नकाबपोशों द्वारा हमले होते है जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलो के बहिष्कार की धमकी दी थी....परमाणु बनकर विनय उन सभी कैम्पस मे मौजूद लोगो को बचा लेता है पर इस हमले के बीच मे एक चैम्पियन भारतीय मेराथन एथलीट मारा जाता है.

खेलो की से पहले परमाणु राज़ खोलता है की कुछ देशो (जिनके नाम आप लोग खुद जानते है) के एथलीटस और सपोर्टिंग स्टाफ ही असल मे आतंकवादी है...इन्होने ही अन्दर रहकर ये अपराध किये क्योकि अब तक  परमाणु और क्लोज सर्किट केमराज़ ने किसी बाहरी व्यक्ति को खेल गाँव के अन्दर जाते नहीं पकडा था. खेल गाँव आने के एक दिन बाद इन्होने अपने इंतजाम पूरे करके भारत को बदनाम करने के लिए ये अपराध किये. इन खेलो मे शामिल होने के लिए ये कई सालो से तैयारी कर रहे थे और इनकी सरकारों के हस्तक्षेप से अच्छे खिलाडियों की जगह उनके देशो के खेल संचालन करने वाले संस्थानों ने इन्हें खेलो के लिए चुना.....क्योकि राष्ट्रमंडल खेलो का स्तर ओलंपिक खेलो जैसा नहीं है जहाँ हर खेल मे भाग लेने के लिए मुश्किल और बड़े क्वालीफाई स्तर होते है और यहाँ ज्यादा "वाइल्ड कार्ड" धारक खिलाडी भी शामिल हो सकते है.  राज खोलने मे परमाणु की मदद खेल गाँव मे भेस बदल कर रह रहे वक्र ने की थी.

पर इन आतंकियों का असली मकसद भारत को बदनाम करना नहीं बल्कि खेल गाँव को अपने कब्जे मे लेकर अपनी असंवेधानिक मांगें मनवाना था.....गिनती करने पर पता चला की परमाणु उन आतंकी दलों के सभी लोगो को नहीं पकड़ पाया था और उनके बचे हुए खिलाडियों, आदि ने खेल गाँव पर कब्ज़ा कर लिया था. परमाणु उन आतंकियों से लड़कर सभी बंधको को सुरक्षित बचा लेता है जिसमे उसकी मदद करता है भारतीय खेमे मे शामिल Allrounder वक्र. राष्ट्रमंडल खेल अपने समय से शुरू होते है.....और खुद विनय उस मरे हुए मेराथन रनर की जगह दौड़ कर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतता है.

The End.

Saturday, October 13, 2012

Raj Comics Generation Next Writers Workshop


Raj Comics Generation Next Writers Workshop Contest (2008)





Timeline : December 2007 to January 2008 [First event organized by RC]

Workshop for Selected Writers : 25 January 2008 to 27 January 2008.
 

Organized by Raj Comics Management and hosted on Raj Comics Forums & Website.

Judges : Sanjay Gupta ji, Kshitish Padhy, Tarun Kumar Wahi ji, Anupam Sinha ji.


Ye Raj Comics ka official contest ka jiske winners ko January 2008 mey Raj Comics mey iss workshop kay liye invite kiya gaya tha. Kuch selected log aa nahi paaye to unki jagah doosre forum members ko bula liya gaya. Wahan kay liye selected members aur wahan aane waale members dono kay naam mila kar likh raha hun. Contest se related topic ab record mey nahi hai par is event ki bahut saari pics forum par hai.

Winners :

1 : Muneer Beri (Munna Bhai) (Walkover)

2 : Mandaar Gangele (Wishumady)

3 : Suman Sucharit Das (Tuti Singh)

4 : Pankaj Vijayvargiya (Shaan_K) (Walkover)

5 : Rahul Shashank (Taker)

6 : Shadab Siddiqui (Shasid)

7 : Soumya Sucharir Das (SCB)

8 : Abhishek Sagar

9 : Mohit Sharma (Trendster)

10 : Mehfooz Ali (Walkover)

11 : Himanshu Singhal (Smart Indian)

12 : Gaurav Shrivastava

13 : Anurag Kumar Singh (Anu)

14 : Parijat Kushwaha (Selected, Event not Attended)

15 : Vivek Shankar (Stunner1) (Selected, Event not Attended)

16 : Priyashrav Bharadwaj (Supi) (Selected, Event not Attended)

Vishal Upadhyay (Bunty98), Abhishek Gautam (Aashu) aur Musharraf event ki wajah se apne aap shaamil ho gaye