अंतरजाल की दुनिया और जीवन में मोहित शर्मा 'ज़हन' के बिखरे रत्नों में से कुछ...

Sunday, March 31, 2013

Vyavharik aur Zaroori Gyan



मैंने स्कूली ज्ञान को कभी ज्यादा महत्व नहीं दिया, इसलिए ऑन रिकार्ड्स ठीक-ठाक नंबर ही आते थे। भारत मे शिक्षा के लिए अलग ही पद्धति है, मैंने ऐसे बहुत से "होनहार छात्र" देखे जिनमे व्यावहारिक और ज़रूरी ज्ञान की कमी थी (अभी भी होनी चाहिए). जैसे किताबो की बाहर अगर कोई इंस्पेक्शन वाले सर/मैडम कुछ पूछ लें तो सामान्य ज्ञान तक की बातों का उनके पास जवाब नहीं होता, उनका तर्क होता की जो कोर्स में नहीं उसको पढ के क्या फायदा?

जैसे सातवी कक्षा में बाहर से आये सर ने पूछा किसी भी सरकारी डिपार्टमेंट या कंपनी, विभाग का नाम बताओ। टीचर ने 2-4 होनहार बच्चो को पूछा, फिर सर ने कुछ बच्चो को खड़ा किया जिनमे मै भी था इतने निरुतर बच्चो को देख सर को थोडा गुस्सा आया। टीचर भी अब गिव अप कर चुकी थी क्योकि उनके इक्के-बादशाह शहीद हो चुके थे ...अब तो क्लास के अठ्ठे-नेहलो का इंटेरोगेशन चल रहा था। मेरी बारी आई तो मैंने डरते हुए कहा "रेलवेज ...."

सर ने चिल्ला कर कहा गलत है.

मैंने कहा "तो रोडवेज ...."

"गलत"...ऐसे करके मैंने पुलिस, सचिवालय, दूरदर्शन, सेना कहा और वो गलत-गलत बोलते रहे।

जब मै चुप हुआ तो वो मेरी तरफ बढ़े, मैंने सोचा हमेशा की तरह गयी भैंस पानी में। फिर उन्होंने कहा तुमने जो भी विभाग बताये सब सही है। थोड़ी तालियाँ बजी, सर ने शाबाशी दी .....मै 2-3 क्लासेज मे खुश रहा बस फिर सब पहले के ढर्रे पर वापस।

"मोहित, अभ्यास पुस्तिका मे काम पूरा क्यों नहीं हुआ? हाथ ऊपर करके दिग्विजय और गंगा के साथ जाके खड़े हो जाओ।"

चलिए स्कूल को छोडिये अब MBA में भी सहपाठी फेकल्टी की दी प्रेजेंटेशन स्लाइड्स, pdfs, hand-outs, booklets रट कर परीक्षा देते है, अपने असाइंमेंटस करते है ....ज़रा सी बाहर से आई बात या कांसेप्टस पर अधिकतर छोटे बच्चो की तरह ये मटेरियल में नहीं था जैसी शिकायत करते है।

मै ये नहीं कह रहा की पढाई मत करो या जो पढाई करते है वो गलत है, मै बस इतना कह रहा हूँ की अपना दिमाग खुला रखो और भी चीज़ों के लिए। भारतीय शिक्षा पद्धति में बड़े बदलावों की ज़रुरत है।

- मोहित शर्मा (ट्रेंडी बाबा)

Saturday, March 30, 2013

Comic Con India Criticism


****माफ़ कीजिये यहाँ एक जनरल बात कर रहा हूँ एक कॉमिक इवेंट का उदाहरण देकर। तो कॉमिक की बात करनी पड़ गयी।****

मैं दिल्ली कॉमिक कॉन 2013 के आखरी दिन वहाँ पहुँचा तो कुछ बातें खटकी। वो मज़ा नहीं आया .... वो कॉमिक फीवर कहीं गुम था। कॉमिक कॉन इंडिया का मतलब सब नहीं तो ज़्यादातर इंडियन कॉमिक प्रकाशन रीप्रेजेंट होने (या कम से कम) फीचर होने चाहिए थे। इंडियन कॉमिक्स प्रमोट करने से ज्यादा मुझे एक कॉमर्शियल अप्रोच लगा जैसे कोई आउटसाइडर प्रायोजित कर रहा हो ....कोई इवेंट मैनेजमेंट कंपनी (हालाँकि पॉप कल्चर पब्लिशिंग इनकी ब्रांच है)।

यह बात उनके अवार्ड्स मे भी झलकती है .....एंट्रिज मे बहुत सी बड़ी इंडियन कॉमिक पब्लिकेशंस का नाम ही नहीं तो ये सही मानक कहाँ हुए? कुछ समय पुराने आर्टिस्ट को अवार्ड मिले और इंडसट्री मे 3-4 दशको से एक्टिव क्रिएटिवस नोमिनेशन्स मे तक न हो, अजीब है। जिन कंपनीज की इवेंट मे स्टाल्स है बस उन्ही तक अवार्ड सीमित होना ....ये भी अजीब लगा मुझे। भारत के कॉमिक कॉन मे भारतीयता की कमी लगी मुझे। मुझे पाश्चात्य सभ्यता से कोई दिक्कत नहीं है मै उनका भी आदर करता हूँ बल्कि कॉमिक कॉन का कांसेप्ट उन्ही की देन है पर भारत कॉमिक कॉन का मतलब है की बाहर के देशो का स्टाइल और भारतीय स्टाइल दोनों की झलक मिले यहाँ बाहरी स्टाइल काफी हद तक हावी रहा। भारतीय कॉमिक कॉन मैनेजमेंट को अपना दायरा इंग्लिश से आगे स्थानीय भाषाओ तक बढ़ाना होगा तभी सही मायनों मे ये भारतीय कॉमिक कॉन कहलाया जायेगा (मेरी नज़रों मे)। मै उनको धन्यवाद देता हूँ पर कोमेर्शियल होने की जगह अगर वो कॉमिक कल्चर को प्रोमोट करें तो लोंगर रन मे उनका ही फायदा होगा।

- Mohit Trendster

Friday, March 29, 2013

Indian Comics Fandom (Vol. 5)




Indian Comics Fandom (Vol. 5)...out now! Free! Includes

*) – Indian Comics Teasers, News Articles, Updates.
*) – Popular Indian Web Comics.
*) – Reviews : Code Name Comet - Saurabh Agrawal, Aghori (Book 2) – Anuj Sharma, Ravan Doga – Youdhveer Singh, Shiva: The Legends of Immortal (Book 2) – Rahul R. Sharma.
*) – Interviews – Rahul Ranjan & Youdhveer Singh (Eesh Khan), Tushar Trivedi (Mohit Sharma).

Available on over a dozen websites-networks. Readwhere, ISSUU, Minus also provide options for online reading and hand held devices....

*) – Readwhere :
http://www.readwhere.com/publication/3406/indian-comics-fandom-vol-5

*) – ISSUU :
http://issuu.com/mohit-trendy-baba/docs/indian-comics-fandom-vol-5

*) - Minus :
http://trendybaba.minus.com/lDdtb1VCBYTjJ

*) - Mediafire :
http://www.mediafire.com/view/?67sx7z4iv8aavu4

*) – Scribd :
http://www.scribd.com/doc/133010228/Indian-Comics-Fandom-Vol-5

*) – PDF Archive :
http://document.li/470x

*) – 4Shared :
http://www.4shared.com/office/N05HTwU3/Indian_Comics_Fandom__Vol_5_.html

Also on Pothi, Myebook & allied websites.

- Mohit Sharma (Trendster / Trendy Baba)

Thursday, March 28, 2013

Chor ka Logic !!!! :)


....Filmy Clicheness, Jo wakai mein chor NAHI hota wo bhi to ye hi bolega Uncle ki "Mai Chor NAHI hun..."
 "Maine Chori Nahi ki..."
 "Chup! Har chor ye hi bolta hai..."
"To jo chor nahi hai wo bhi to wo kya bolega?....Mai Tumhare bachche ki maa banne waali hun!!!"
- Mohit Sharma (Trendster / Trendy Baba) 

Wednesday, March 27, 2013

Ishq mey Chloroform feat. Hum Tum & Love


Ishq Mey Chloroform story featured at Hum Tum & Love Page and Group. I thank Abhinav Dutta ji for selecting the story.

Meri Bhaang Wali Ice Cream !!!! (Poem, 18+)


 Masti mey ye rhyming ki hai hip hop style with naughty punches. Aap sabhi ko ek baar phir se Happy Holi!!! Just for fun...



Meri Bhaang Wali Ice Cream !!!!

Aetbaar karegi to jaanegi….
Labo se lagayegi to baat maanegi…
Dil bolega tring-tring….jo legi tu..
Meri Bhaang waali Ice Cream !!!!

Pila deta hai ye saaki bade auhdo tak ko paani….
Ek to fitting ka salwar-suit tera…
Aur doosra qatil tera dupatta Dhaani…
Ban jaa janeman mere naatiyon ki Nani…
Nikalva degi teri multiple Screams…
Meri Bhaang waali Ice Cream !!!!

Festive season ki chhut mujhe bhunani…
Point Blank range se apni pichkari hai chalani…
Free ki nahi hai ye Ice Cream…teri haath ki ghujiya hai khaani….
Itne nakhre sehat kharab kar denge meri Rani....
Kar degi tera har signal Green...
Meri Bhaang waali Ice Cream !!!!

Uncle nahi hai ghar pe…
Nashe mey apna ghar samajh ke abhi unhe aadhe ghante peeche ke gharo ki kundi hai khatkhatani...
Anyway, phir bhi chhupa di hai maine unki bandook Dunali…
Ab ye teri zimmedari hai…..tumhe sirf Aunty hai sulaani…
Kab samjhogi bada ho gaya hai….teri colony ka Chhota Bheem….le na..
Meri Bhaang waali Ice Cream !!!!

Gum ho jaayegi teri double chin…
Mera Intezaar karegi taare gin-gin…
Phir chahe jab bhi milegi…gaal par haath phira kar bolegi…”How have you been?”
Jamegi apni tagdi tag team…
Bhaang ki kick better than vodka-desi-rum ya jin….
Ghoomayegi muft mey tujhe London se Chin…
Charsi ho gaya tere pehlu ke bin…
Mat kar mera dil tod ke sin…
Jaldi muh mey le…arre, ab to pakad…pighalne lagi hai…
Meri Bhaang Waali Ice Cream !!!!

- Mohit Sharma (Trendy Baba)

Tuesday, March 26, 2013

Holi ka Mahatva (Article)

**Holi Message** (Chalte-Chalte Page & Group)




कुछ समय के लिए चलते-चलते पेज का एडमिन बनाया है देवेन भाई ने। जिसके लिए मै उनका आभारी हूँ। आप सभी को होली की ढेर सारी बधाई!! आशा है ये पर्व आपके जीवन मे और अधिक खुशियाँ लाये. साथ ही एक सन्देश भी है सभी मित्रों के लिए।

होली बुराई पर अच्छाई की जीत है। वो तो कई त्यौहार होते है तो इसमें ख़ास बात क्या है? ख़ास है प्रह्लाद कि अपने ही पिता से धर्म के लिए लड़ाई। किसी बाहरी दुविधा, उलझन मे घर वाले साथ देते है पर तब क्या हो जब युद्ध अपनों से ही हो ....वो भी आर-पार। बुराई की खासियत होती है कि छोटी-छोटी बातों से होती हुई वो जन-मानस के रहन-सहन में बस जाती है। पहले छोटी बुराई करते हुए अंतर्मन रोकता है फिर वो बाधा पार करने के बाद अपने मतलब के लिए की गयी बड़ी बुराइयों को भी व्यक्ति सही ठहरा देता है।

अच्छाई के साथ होना आजकल के दौर में लोगो को फायदे का सौदा नहीं लगता क्योकि जब आस-पास लगभग हर कोई गलत रास्ते अपनाता है तो उनके जैसा होकर लाभ पाने को मन गलत नहीं मानता। बल्कि जो ऐसी बातों का विरोध करता है वो सामाजिक परिधि से बाहर माना जाता है।

भगवान् को पाने का रास्ता है अच्छाई, ये एक तपस्या ही तो है की लगातार बाहर समाज की ठोकरें और उस व्यक्ति की मानसिकता पर संशय, फिर धीरे-धीरे अपनों का पराया हो जाना ....और इन सब के बीच खुद से अपने व्यक्तित्व और जीवन पर सवाल ....आखिरकार कितने कोणों से तराशे जाने के बाद व्यक्ति हीरा बनकर उसी समाज के लिए चमकता है जिसमे उसको सदैव अपमान, उपेक्षा व् ठोकरों को सहना पड़ा।

लालच का जीवन कुछ दशकों का हो सकता है पर सही राह पर चलने वालो की कहानियाँ पीढियां-दौर-युग लाँघ कर अमर हो जाती है। जो लोग तुम्हे समाज कि सीमा मे न चलने पर कोसते है उनमे भी अपने अंदर का कूड़ा झेलने की हिम्मत नहीं है, वो भेड़-चाल वाला झुण्ड बनाकर उसकी आड़ में तुम्हे कोसते है ..ऐसे लोग किसी ज़ोमबी से कम नहीं होते...शायद वो अन्दर ही अन्दर नहीं चाहते की तुम्हारे जीवन की कहानी अमर हो .....अब यह तुम्हारे ऊपर है की तुम उन्हें गलत साबित करो या हारकर उनका हिस्सा बन जाओ। इस पावन पर्व पर अच्छाई की जीत हुई थी आगे भी जीत होती रही इसका बीड़ा उठाओ।

आपका मोहित शर्मा (ट्रेंडी बाबा)