"……is a multiple award-winning Author-Poet, Researcher & Social Activist (Education, Poverty, Child Labour and Fight against Negative Generalization). He is currently based in Meerut, Uttar Pradesh. With hundreds of published works in various genres Mohit is one of the youngest members of Fenil Comics team. He is knowN for his poetic comics in comics world published by fenil comics at digital platforms. Currently he is working on different projects of fenil comics like detective stories of jasoos balram for 10 ka dum series.”
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अंतरजाल की दुनिया और जीवन में मोहित शर्मा 'ज़हन' के बिखरे रत्नों में से कुछ...
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Tuesday, January 14, 2014
Tuesday, June 4, 2013
Monday, June 3, 2013
Behri Duniya (Teaser)
Artwork - Soumendra Majumder, Manabendra Majumder
Calligraphy - Youdhveer "Warrior" Singh
Research, Poetry and Script - Mohit Sharma (Trendster / Trendy Baba)
शायद मेरी आह तुझे अखरने लगी ....
तभी अपनी रफ़्तार का बहाना बना मुझे अनसुना कर गयी ...
मेरा शौक नहीं अपनी बातें मनवाना,
किन्ही और आँखों को तेरी हिकारत से है बचाना !!
तुझसे अच्छी तो गली की पागल भिखारन.....
मुझे देख कर मेरे मन का हिसाब गढ़ लेती है ..
आँखों की बोली पढ़ लेती है ....
उम्मीदों से, लकीरों से ...
तड़पते पाक ज़मीरों से ....
इशारों से ....दिल के ढोल गँवारों से ...
कभी तो भूलेगी अपनी और मेरी कमियाँ,
मेरी बात सुनेंगी ....समझेगी यह बहरी दुनिया!!
तभी अपनी रफ़्तार का बहाना बना मुझे अनसुना कर गयी ...
मेरा शौक नहीं अपनी बातें मनवाना,
किन्ही और आँखों को तेरी हिकारत से है बचाना !!
तुझसे अच्छी तो गली की पागल भिखारन.....
मुझे देख कर मेरे मन का हिसाब गढ़ लेती है ..
आँखों की बोली पढ़ लेती है ....
उम्मीदों से, लकीरों से ...
तड़पते पाक ज़मीरों से ....
इशारों से ....दिल के ढोल गँवारों से ...
कभी तो भूलेगी अपनी और मेरी कमियाँ,
मेरी बात सुनेंगी ....समझेगी यह बहरी दुनिया!!
Wednesday, May 22, 2013
Sunday, April 21, 2013
Woh Khush Hai! (Poetic Comic Ad)
This poetic comic is published by Fenil Comics.
वो खुश है!!
सोच डांट कर कहती है कि 'हर चीज़ है वैसी, किस बात की है कमी?'
दिल भी बिफरा 'माना आसमां का रंग वही है, मिट्टी की महक वो नहीं।'
मुल्को कि बनावट उन्हें लुभाने लगी,
झूठी जन्नत ना लगे मुझे सगी।
ये अंदाज़ा ना लगाया जब मेरी बोली लगेगी ....
माँ-बाबू जी को वो मोल लायेंगे ...
पैसों से रिश्ते क़त्ल हो जायेंगे ...
फिज़ा कहती है वापसी अब हक़ीकत नहीं ....
पलट कर जवाब दे सकूँ उतनी मेरी कीमत नहीं ....
इंतज़ार मे रहा किये जिसके वो मौसम बदल गया है,
आईने का अक्स वही है ....
अंदर का शख्स बदल गया है।
सोच डांट कर कहती है कि 'हर चीज़ है वैसी, किस बात की है कमी?'
दिल भी बिफरा 'माना आसमां का रंग वही है, मिट्टी की महक वो नहीं।'
मुल्को कि बनावट उन्हें लुभाने लगी,
झूठी जन्नत ना लगे मुझे सगी।
ये अंदाज़ा ना लगाया जब मेरी बोली लगेगी ....
माँ-बाबू जी को वो मोल लायेंगे ...
पैसों से रिश्ते क़त्ल हो जायेंगे ...
फिज़ा कहती है वापसी अब हक़ीकत नहीं ....
पलट कर जवाब दे सकूँ उतनी मेरी कीमत नहीं ....
इंतज़ार मे रहा किये जिसके वो मौसम बदल गया है,
आईने का अक्स वही है ....
अंदर का शख्स बदल गया है।
Sunday, January 6, 2013
मंद है यह समाज! (Advertisement)
मंद है यह समाज! Kavya Comic (Advertisement) with a shayari, experimental manual coloring here.
कहते है वो की मै दुनिया की दौड़ के काबिल नहीं .. .
कुछ माखौल उड़ाते है तो कुछ को तरस आता है ..
कैसी यह दौड़ है जिसमे पैसो के लिये भावनाओं को कुचला जाता है?
नहीं दौड़ना तुम्हारे साथ ...मै तुमसा क़ातिल नहीं।
तेज़ तन पर गुमान करने वालो ..एक सौदा करलें आओ,
मेरा साफ़ मन भी ले लो ...बदले मे मुझे एक खूबसूरत जहान देते जाओ।
- Mohit Sharma
कहते है वो की मै दुनिया की दौड़ के काबिल नहीं .. .
कुछ माखौल उड़ाते है तो कुछ को तरस आता है ..
कैसी यह दौड़ है जिसमे पैसो के लिये भावनाओं को कुचला जाता है?
नहीं दौड़ना तुम्हारे साथ ...मै तुमसा क़ातिल नहीं।
तेज़ तन पर गुमान करने वालो ..एक सौदा करलें आओ,
मेरा साफ़ मन भी ले लो ...बदले मे मुझे एक खूबसूरत जहान देते जाओ।
- Mohit Sharma
Friday, November 16, 2012
Saturday, November 3, 2012
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