अंतरजाल की दुनिया और जीवन में मोहित शर्मा 'ज़हन' के बिखरे रत्नों में से कुछ...

Sunday, May 12, 2013

Book - Potential of Unconventional Sources of Natural Gas in India



100 Page Redacted Project Report : "Potential of Unconventional Sources of Natural Gas in India" 

ISBN: 9781301257324
 
Available - Smashwords, Pothi, Medifire, ISSUU, Minus, Readwhere etc....

http://www.smashwords.com/books/view/315546

- Mohit Sharma (Trendster / Trendy Baba)

 

Saturday, May 11, 2013

दिमाग को उल्लू बनायें....आकर्षक ईनाम पायें!


** दिमाग को उल्लू बनाये....आकर्षक ईनाम पायें! **



कहते है भगवान परीक्षा लेते है हमे नयी, अलग और कठिन परिस्थितियों में डाल कर। इन परीक्षाओं का सबसे बड़ा घटक होता है मानव मस्तिक्ष, बाहरी बातें एवम परिपेक्ष तो झेली जा सकती है पर विपरीत बहाव से लड़ते हुए लगातार नकारात्मक विचार के जनक दिमाग को काबू मे रखना और अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना मुश्किल काम है।

पहला काम जो दिमाग करता है वो आपकी सरहदें तय कर देता है। की आप अपने जीवन में इतना ही पा सकते हो क्योकि आप इतने ही काबिल हो, फिर भी आप अगर उस सरहद के बंधन से कभी छूटने की कोशिश करो तो पुराने कुछ बुरे अनुभवों का हवाला देकर आपकी फूटी किस्मत को आपका दिमाग आपको समय-समय पर याद दिलाता रहता है। सबसे बड़ी गलती हम किसी काम को एकसाथ देखकर उसका आंकलन करने मे करते है अगर एक बड़े काम को उसकी इकाइयों मे बाँट कर देखा और किया जाए तो वो इतना बड़ा हौवा नहीं लगता जितना एकसाथ देखने पर प्रतीत होता है।

दूसरी बात हमारा दिमाग बड़ा चूज़ी नेचर का होता है। देखिये ख़बरें आपको तब मिलती है किसी के बारे में जब वो काम पूरे कर लेता है या कुछ हासिल कर लेता है। बीच मे उसका संघर्ष या जो कुछ घटनाएँ हुई उनसे सरोकार रखना तो जैसे दिमाग ने सीखा ही नहीं। वो सफलतायें, जीत देख कर और हीन भावना भरने की कोशिश होती है आपके दिमाग की पर खुद को आप उस "सफल" व्यक्ति की काम शुरू करने की स्टेज से अपनी तुलना करोगे तो कई बार आप खुद आश्चर्यचकित हो जाओगे की आपने अपने अन्दर क्या सागर छुपा रखा है। अब आखरी दिमागी अड़चन जो जैसा चल रहा है उसके बदलने का डर, गुस्सा ....नयी बातों, चीज़ों और बदलावों को अक्सर दिमाग अनचाहा मानता है। उनसे आपको भी डरा देता है की आगे अगर कुछ बदला तो नकारात्मक ही होगा। हाँ, कुछ बातों मे आपको समझौता करना पद सकता है पर शायद ये समझौतें आगे आपकी मदद करें एक बेहतर जीवन के लिये।

कुछ गंभीर बिमारियों मे मरीजो को बताया गया की कुछ दवाईयाँ इस बिमारी का इलाज है। कुछ समय तक दवाईयाँ लेने के बाद उनमे बड़े सुधार देखे गए जो अन्यथा किसी इलाज, दवा से संभव नहीं थे। असलियत ये थी की वो बस नाम की दवाई थी पर दिमाग को उल्लू बनाकर शरीर ठीक हो गया। नहीं तो दिमाग फिर एक दायरा बांध देता की ये तुम्हारी बिमारी है और तुम ठीक नहीं हो सकते। इसी तरह अपने आज की स्थिति की परवाह किये बगैर दिल से कोशिशें कीजिये क्या पता दिमाग को उल्लू बनाकर आप अपनी किस्मत ठीक कर लें।
अगला लेख यारी-दोस्ती पर ....

Badhna Zaroori Hai!

 ** बढ़ना ज़रूरी है **


 
अक्सर लोगो को उनकी किस्मत को कोसते हुए देखता हूँ। जिंदगी की बड़ी बातों से लेकर छोटी से छोटी बातों में अपने भाग्य का हवाला देने लगते है। मानता हूँ की किस्मत नाम की चीज़ होती है और इसका जीवन पर असर होता है पर अगर कोई काम करते वक़्त या उस से पहले यह फूटी किस्मत वाली बात सोचेंगे तो जितना अच्छा आप कर सकते है वो भी नहीं कर पायेंगे। किस्मत को मानिए पर इसको मन मे मत बिठाइये।

कहने का मतलब चाहे काबिलियत से कम ही सही पर जीवन मे रफ़्तार ज़रूर होनी चाहिए, मायूसी या हार मानने से काफी बेहतर धीमी रफ़्तार है। शायद जहाँ तक नज़र जाए वहां तक उम्मीद न लगे पर शायद जहाँ तक वो नज़र जाए वहाँ जाकर जब आप देखोगे तो इच्छित सफलता का मार्ग दिख जाये l

- Mohit Sharma ( Trendster)

Thursday, May 9, 2013

चपल चीन, चप्पल भारत

**** चपल चीन, चप्पल भारत ****



यह शीर्षक इसलिए सोचा की भारतीय व्यवस्था मे कई दमदार योजनाएँ पूरी होते होते अपना अर्थ और दिशा ही खो देतीं है। 


चीन के बारे में एक और रोचक बात आप सबके साथ बाँट रहा हूँ। अंतरराष्ट्रीय व्यापार डील्स, प्राकर्तिक सम्पदाओं जैसे तेल के कुओं, समुद्र क्षेत्र आदि का अधिग्रहण जब कोई देश करवाता है तो ऐसे व्यापारिक मामलो में कई देश हिस्सा लेते है और राजनैतिक संबंधो, भौतिक, पैसो, प्लान, कोटेशन आदि मे जो देश आगे रहता है या जिस देश की कंपनी आगे रहती है उसको डील या व्यापर कॉन्ट्रैक्ट मिल जाता है। बस यहीं चीन ने एक नयी कूटनीति अपनाई है जैसे तेल, प्राकर्तिक गैस भण्डारो की डील मे उसकी 8 तेल कंपनियाँ एक साथ मिलकर कोटेशन और बाकी जुड़ा काम करती है एक बैनर तले जिसकी वजह से दूसरे देशो की बड़ी कम्पनियाँ भी उन आठ संयुक्त कंपनियों के सामने बौनी दिखाई पड़ती है। भारत की निजी और सरकारी कंपनियां राष्ट्रीय सम्पदा आवंटन नेल्प योजना पर ही साथ नहीं आ पायीं अब तक वो विदेशो मे ऐसे एकजुट हो पाएंगी ये मुश्किल लग रहा है निकट भविष्य मे।

जैसे अब कुछ समय से अफ्रीका की प्राकर्तिक सम्पदा पर चीन की नज़र है और वो तेज़ी से लम्बे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स, डील्स और अधिग्रहण करके अपना रास्ता साफ़ कर रहा है। वहां की सरकार का लोगो और विदेशो को दिखाने भर के लिए सामाजिक रवैया है, न की भारत जैसा लोकतांत्रिक। वैसे लोकतन्त्र एक अच्छी व्यवस्था होती है पर भारतिय राजनेताओ एवम अफसरों की धीमी, डरी सी, ढुल-मुल शैली पर ये जमती नहीं उल्टा उन्हें और आलसी बना देती है।

जब तक इनका बिल पारित होता है, नीतियाँ बनती है, कमेटियाँ बैठती है और बाकी चोचला चलता है तब तक चीन टारगेट क्षेत्रो मे काम शुरू कर भारत की व्यापारिक उम्मीद ही ख़त्म कर देता है। कमी सोचने वालो और उनकी नीतियों मे नहीं है .....कमी करने वालो के संचालन और नीतियों के कार्यान्वयन में है।

- Mohit Sharma Trendster

Tuesday, May 7, 2013

चीन की दूषित नीति

 
अगर आपकी कॉलोनी या इलाके मे आपकी 2-3 लोगो से किन्ही बात पर अनबन होती है तो कॉलोनी वाले सोचेंगे की किसी की भी गलती हो सकती है लड़ने वालो में पर जब कॉलोनी के ज़्यादातर लोगो से आपकी किसी न किसी बात पर खटपट हो तो किसी को वेरीफाई नहीं करना पड़ेगा की गलती किसकी है ...कमी किसमे है। ऐसे में तो कमी और गलती आपकी है। कुछ यही हाल चीन का है जिसका अपने ज़्यादातर पडोसी देशो से सीमा एवम समुद्री क्षेत्र पर विवाद रहता है। भारत, ताईवान, दक्षिण कोरिया, जापान, फिलीपिंस, वियतनाम, उत्तर कोरिया तो कुछ उदाहरण भर है। चीन को जैसे अपनी सीमा बढाने का शौक सा है जिसके लिए वो बाहरी इलाको पर अनैतिक दावे, घुसपैठ करता आया है। सेटेलाईट मार्किंग, मॉनिटरिंग के ज़माने मे तक ऐसी गतिविधियाँ जारी है। चीन की विदेश नीति उसकी असल आज़ादी 1949 के बाद से आक्रामक रही है जिसके चलते कई बार युद्ध की स्थिति आई है, ये शायद चीन का विशालकाय आकार है जो पडोसी देश उसके गलत रवैये को भी सह लेते है।

भारत को सुदूर क्षेत्रो में संचार माध्यम, बुनियादि सुविधाएँ देनी होंगी ताकि वहाँ कुछ आबादी फले और उजाड़ 'नो मेन्स लैंड' जिसकी दुहाई सी देकर चीन कई किलोमीटर अन्दर तक चला आता है वो ना हो। ऐसा करने से सीमावर्ती सेन्य और अर्धसैनिक बलो को भी सुविधाएँ, संचार सुचारू रूप से होगा। पूर्वोतर राज्यों, जम्मू-कश्मीर के चीन से सटे बड़े इलाको में काफी कम जनसँख्या है दुर्भाग्यवश अगर वोटरों की संख्या यहाँ से ज्यादा होती तो सरकार खुद सीमा पर तम्बू गाड़ लेती अपने वोट बैंक्स बचने के लिये।

- Mohit Sharma Trendster

RC Visit (May 2013)

Aaj 2-3 saal baad phir RC Office gaya. Wahan Sanjay ji, Abhishek Dear, Manoj ji, Vivek Mohan ji, Hemant Bhai se mila. Achchha anubhav tha...at present RC creatives par workload bahut zyada hai. Abhishek to heera ladka hai, jitna kaho utna kum...apne Hemant Bhai to superstar hai hi, sahi se artist aur Dilli wala bana rahe hai Abhishek ko. Sanjay ji se itne gap k baad kaafi baaten hui.

Ek aur vaakya hua Vishvavidhyalay Metro se jo auto liya RC Burari jaane k liye us autowaale (Surender) ko bataya Burari jana hai....jab usko bataya ek publication hai to usne pucha Raja Pocket Books, maine haan kaha to usne bataya ki wo pehle jude wahan se kai artists ko jaanta tha...aur ab senior artist Rakesh Gurung ji k saath unke struggling days mey rehta tha...

"Jab Rakesh chatai par sota tha aur baarish k time mey paani bhar jata tha to uske liye Charpaai lata tha mai...ab to uska naam cartoono mey neeche likha aata hai, mai to Sant Nagar hi reh gaya Sahab, wo to khoob aage nikal gaya. Noida mey rehta hai shayad ab..." Baaki baaten phir kabhi....

P.S. Pata nahi kyu jo koi net par achchhe se jaanne wala banda real life mey milta hai mujhse to pehchaan hi nahi pata mujhe pehli baar mey...
 - Mohit Sharma Trendster